नई दिल्ली। देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान आईआईएमसी के प्रोफेसर अमित सेनगुप्ता ने संस्थान के ओएसडी पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया है। सेनगुप्ता ने यह आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया कि दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या और जेएनयू तथा एफटीआईआई मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने उन्हें निशाना बनाया। अंग्रेजी पत्रकारिता विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर अमित सेनगुप्ता ने ओडिशा के ढेंकानाल जिले में अग्रणी मीडिया स्कूल के कैंपस में तबादले के जारी आदेश के बाद इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राजनीतिक फैसला कहकर इसकी आलोचना की।

सेनगुप्ता ने अपने इस्तीफा पत्र में लिखा कि मुझे निशाना बनाया गया क्योंकि मैंने आईआईएमसी के छात्रों द्वारा कैंपस में स्वतंत्र रूप से आयोजित किए गए रोहित वेमुला के लिए एकजुटता प्रदर्शन में हिस्सा लिया, इसमें संकाय के अन्य सदस्य भी शामिल हुए थे। मुझे इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि मैंने जेएनयू और एफटीआईआई छात्रों का समर्थन किया।

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राजनीतिक रूप से आईआईएमसी के संकाय सदस्य को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज करते हुए सूचना और प्रसारण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए कैंपस के राजनीतिकरण सहित सेनगुप्ता की अनुशानहीनता की कुछ हरकतों का पता चला था। हालांकि अधिकारी ने कहा कि ढेंकानाल कैंपस में संकाय की कमी के कारण सेनगुप्ता को अस्थाई रूप से भेजा गया। आरोपों पर प्रतिक्रिया में सेनगुप्ता ने कहा कि सोशल मीडिया पर रखा गया उनका नजरिया उनके निजी दायरे में हैं यह उनका संवैधानिक अधिकार है।अपने फेसबुक पोस्ट में गु्प्ता लिखा कि संस्थान के ओएसडी ने बिना उनसे या किसी भी फैकल्टी से बात किए बगैर ही आईआईएमसी की धेनकनाल शाखा में उनका ट्रांसफर कर दिया है जो कि आईएमएमसी की  अकादमिक स्वतंत्रता और स्वायत्ता के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि ये साफ है कि मुझे निशाना बनाया जा रहा है और ये दर्शाता है कि इस प्रशासन द्वारा अकादमिक स्वायत्ता और बुद्दिजीवियों पर हमले जारी है।  कुछ लोगों को चुन चुनकर इस प्रशासन द्वारा टारगेट किया जा रहा है और ऐसा क्यों हो रहा है ऐसा केवल वे ही बता सकते है।

उन्होंने आगे लिखा कि मुझे गर्व है कि मैंने रोहित वेमूला के लिए कई और लोगों की तरह ही आवाज उठाने की कोशिश की और आने वाले दिनों में भी रोहित वेमूला के लिए ये संघर्ष करता रहूंगा, ये मेरा संवैधानिक अधिकार है। मुझे लगता है कि रोहित और हैदराबाद विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों के साथ अन्याय हुआ है और उन्हें न्याय मिलना ही चाहिए। मैं हमेशा दलितों के अधिकारों के लिए लड़ता रहूंगा।

उन्होंने आगे लिखा कि मुझे लगता है कि जेएनयू और एफटीआईआई के संघर्षों को आने वाली पीढ़ियां याद रखेगी और तमाम परेशानियों के बीच जिस तरह से इन छात्रों ने इस संघर्ष को अंजाम दिया वह काबिलेतारीफ है। उन्होंने लिखा कि जेएनयूएसयू के पूर्व प्रेसीडेंट के तौर पर जेएनयू के लोगों के बीच उन्हें संबोधित करना अपने आप में एक अभूतपूर्व अनुभव था और मेरे लिए ये फक्र की बात है कि मैं जेएनयू के बुद्दिजीवी वर्ग और राजनीतिक विचारधाराओं के बीच काफी कुछ सीख सका।

उन्होंने लिखा कि मुझे गर्व है, जेएनयू की विरासत पर, जहां हमेशा दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष किया जाता है,  जहां हर किस्म के विचारों को लोकतांत्रिक तरीके से जगह मिलती है। आपने केवल मुझे ही नहीं बल्कि जेएनयू की विरासत को निशाना बनाया है। मैंने हमेशा अपने छात्रों को निष्पक्षता के साथ पत्रकारिता करने की सलाह दी है। (ibnlive)

English Summary

Professor Amit Sengupta of the prestigious Media Institute IIMC resigned alleging serious charges on OSD. Sengupta resigned alleging that the Ministry of Information and Broadcasting targeted him because he supported the protest of Rohit vemula, JNU, FTII.

 


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