tanzil ahamad
बिजनौर।  एनआईए अधिकारी मुहम्मद तंजील की हत्या मामले में बरेली जोन के आईजी का सफेद झूठ सामने आया है। आईजी ने दावा किया था की पुलिस मात्र पांच मिनट में घटना स्थल पर पहुंच गई थी, लेकिन घटना के चश्मदीद जिसने सबसे पहले रात में 100 नंबर पर फोन कर पुलिस को हत्या की सूचना दी थी। उसका दावा है कि पुलिस आधे घंटे के बाद भी मौका ए वारदात पर नहीं पहुंची थी।
घटना स्थल से पुलिस चौकी की दूरी मात्र 200 मीटर है और इतनी दूरी तय करने में 1 से 2 मिनट का समय लगता है, लेकिन यहां आईजी साहब अपनी नकारी पुलिस का बचाव करते नजर आए। इतना ही नहीं चश्मदीद की मानें तो पुलिस ने घटना स्थल पर पहुंचने की बजाय सूचना देने वाले शख्स को ही थाने आने के लिए कहा था। चश्मदीद बेचारा इंसानियत का फर्ज निभाने के लिए आधे घंटे तक पुलिस इंतजार करता रहा और बाद में वो ही शख्स घायल डिप्टी एसपी और उनकी पत्नी को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्योहारा पहुंचा।
चश्मदीद आलम
दरअसल बिजनौर में चार दिन पहले देर रात समय लगभग एक बजे एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। बदमाशों ने डिप्टी एसपी को दो दर्जन से ज्यादा गोलिया मारी थी। उनकी पत्नी को 3 गोलियां लगी। उसी समय कुछ देर बाद तंजील के भाई रागिब घटना स्थल पर पहुंचते हैं और उसी दौरान सहसपुर के मीट प्लांट में बिहार के रहने वाले आलम अपनी गाड़ी से सहसपुर जा रहे थे तो डिप्टी एसपी की लड़की ने आलम की गाड़ी रुकवाकर मदद मांगी।
आलम ने सबसे पहले इस हत्याकांड की सूचना स्योहारा थाने में 100 नंबर पर फोन करके दी, लेकिन उसके बाद आलम आधे घंटे तक पुलिस का इंतजार करता रहा। पुलिस तो नहीं आई, लेकिन पुलिस वालों का फोन आया और कहा कि तू अड्डे पर आकर पूरी बात बता इतना ही नहीं पुलिसवालों ने आलम के साथ फोन पर बदतमीजी भी की। आलम आधे घंटे तक पुलिस का इंतजार करने के बाद में तंजील और उनकी पत्नी फरजाना को लेकर स्योहारा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे।
जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मुरादाबाद में कॉस्मोस अस्पताल ले जाने के लिए कहा। तंजील के भाई उन्हें लेकर मुरादाबाद चले गए। इसी दौरान आलम अपने कमरे में पहुंचा तो फिर पुलिस का फोन उसके मोबाईल पर आया। चश्मदीद का आरोप है की पुलिस ने उसके साथ गाली-गलोच की। उसके बाद आलम ने अपना फोन बंद कर लिया। इधर तंजील को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था। उनकी पत्नी का आज भी नोएडा के फोर्टिस हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है।
उधर इस घटना के बाद सबसे पहले डीआईजी और उनके बाद आईजी बरेली जॉन विजय मीणा घटना स्थल पर पहुंचे तो मीडिया के कड़वे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि पुलिस पांच मिनट में पहुंच गई थी। इस दौरान आईजी बरेली ने सफेद झूठ बोलकर अपनी पुलिस की पैरवी की। इतना ही नहीं सहसपुर के लोगों की मानें तो पुलिस ने घोर लापरवाही की थी। वहीं पुलिस की इतनी बड़ी लापरवाही पर आईजी साहब कार्यवाही करने की बजाय पुलिस का बचाव करते नजर आए।
घटना पांच दिन पहले की है और एनआईए और एसटीएफ के बड़े अधिकारी बिजनौर में डेरा जमाए हुए हैं। उसके बाद भी कल सूबे के एडीजी लाॅ दलजीत चौधरी भी आए और उनका भी कहना था कि लापरवाह पुलिस वालों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं किया गया है।
(UPUKLIVE)

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