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सलाफी स्कॉलर जाकिर नाईक ने खुद के ऊपर लगे आतंक के आरोपों को नकारते हुए कहा कि मुझ पर लगाया गया यह आरोप बिल्कुल गलत है कि कुछ आंतकी ग्रुप मेरे भाषण से प्रभावित हुए है. साथ ही उन्होंने उनके एनजीओ इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) के फण्ड के दुरूपयोग के आरोपों से भी इनकार किया हैं.

उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने कई बार एनआईए को सहयोग करने का ऑफर दिया है. उनका कहना हैं कि अगर उन्होंने हिंसा का समर्थन किया होता तो वे मुसलमान नहीं रहते और समर्थन खो देते. नाइक ने कहा, हर धर्म में लाखों समर्थकों में से कुछ समाज विरोधी भी हो सकते है. लेकिन हिसां करने वाले लोग उस संदेश को नहीं अपनाते जो कि मैंने दिया है। मेरी नजर में यदि कोई हिंसा का रास्ता अपनाता है तो वह मुसलमान कहलाना का हक नहीं रखता है.

जाकिर का कहना हैं कि ‘यह आरोप लगाना गलत है कि कुछ शरारती तत्व जो कि आतंकी ग्रुप से जुड़े हैं वे मेरे भाषण से प्रभावित हुए हैं. अगर मैं सच में आतंक को बढ़ावा दे रहा होता तो क्या मैं अब तक लाखों आतंकी नहीं बना देता. लाखों समर्थकों में से कुछ समाज विरोधी लोग हो सकते हैं जो कि हिंसा करते हैं. लेकिन वे उसको नहीं अपनाते, जो मैंने उनसे कहा है। अगर कोई हिंसा का रास्ता अपनाता है तो वह मुसलमान नहीं है और उसे मेरा समर्थन नहीं मिलेगा.

उन्होंने एनजीओ पर लगे बैन को राजनितिक बताते हुए कहा कि आईआरएफ को बीते 6 साल में करीब 47 करोड़ मिले हैं. इसका भी रिटर्न भरा गया है. ऐसे में बैन की वजह राजनीतिक है. गौरतलब रहें कि जाकिर के एनजीओ पर 5 साल का बैन लगा दिया गया और पहले ही विदेश से मिलने वाले चंदे पर भी राक लगा दी गई थी.


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