दिल्ली के जवाहर लाल विश्वविद्यालय (जेएनयू) में कथित भारत विरोधी नारे लगाने के मामले में देशद्रोह का मुक़दमा झेल रहे उमर ख़ालिद ने कहा कि जेएनयू विवाद ने उन्हें मुसलमान होने का एहसास दिला दिया. देशद्रोह केस का सामना कर रहे उमर ख़ालिद और उनके साथी रविवार देर रात यूनिवर्सिटी कैंपस पहुंचे और उमर ख़ालिद ने एडी ब्लॉक पर जमा छात्रों को संबोधित किया.

उमर का कहना था, ”पिछले सात साल में मुझे कभी इस बात का एहसास नहीं हुआ था कि मैं मुसलमान हैं. मैंने ख़ुद को कभी भी मुसलमान की तरह नहीं पेश किया. पहली बार लगा मैं मुसलमान हूं पिछले सात साल में और वो पिछले 10 दिनों में लगा.”

ऐसा कहा जा रहा है कि ये छात्र पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर सकते हैं. उमर ख़ालिद के अलावा रामा नागा, अनिर्बन भट्टाचार्या, अनंत प्रकाश नारायण और आशुतोष कुमार भी कैंपस में देखे गए. उमर ख़ालिद ने कहा कि नौ फ़रवरी को हुए कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारत विरोधी नारे नहीं लगाए थे.

उन्होंने कहा कि उनके ख़िलाफ़ अभी तक कोई समन नहीं भेजा गया है. इन छात्रों ने संसद हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरु को फांसी दिए जाने की दूसरी बरसी पर 9 फ़रवरी को जेएनयू परिसर में एक कार्यक्रम को आयोजित किया था.  इन पर आरोप है कि इन लोगों ने इस कार्यक्रम के दौरान भारत विरोधी नारे लगाए थे.

एक भारतीय टीवी न्यूज़ चैनल में ये ख़बर दिखाई गई थी. उसके बाद पूर्वी दिल्ली से बीजेपी सांसद महेश गिरी की शिकायत पर पुलिस ने इन छात्रों पर देशद्रोह का मुक़दमा दर्ज किया था. इस केस में पुलिस ने छह लोगों को मुख्य अभियुक्त बनाया है.

इन छह लोगों में जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार भी शामिल हैं जिन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था और फ़िलहाल वो जेल में हैं. लेकिन बाक़ी पांच छात्र अब तक फ़रार थे. इन पांच फ़रार छात्रों में उमर ख़ालिद भी हैं जिनके बारे में भारतीय मीडिया में सबसे ज़्यादा चर्चा हो रही है.

लेकिन उमर ख़ालिद के परिवार का कहना है कि उनके बेटे को ग़लत फंसाया जा रहा है. उनके पिता सैय्यद क़ासिम रसूल इलियास ने बीबीसी को कहा था कि उनका बेटा उमर ख़ालिद इस कार्यक्रम के आयोजकों में ज़रूर शामिल था लेकिन उसने कोई भारत विरोधी नारा नहीं लगाया था.

अब कुछ मीडिया ये ख़बरें भी चला रही हैं कि भारत विरोधी नारे लगाते हुए पहले जो वीडियो दिखाया गिया था वो असली नहीं था और उसके साथ छेड़छाड़ की गई थी. (BBC)


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