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असम में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पुलिस, सेना और अर्दद्वसैनिक बलों की चार मुठभेड़ों को फर्जी बताया हैं और राज्य सरकार तथा रक्षा मंत्रालय को हर्जाना भरने का आदेश सुनाते हुवे कहा कि इनमें मारे गये लोगों के परिजनों को 30 लाख रुपए का मुआवजा दिया जायें।

आयोग ने कहा है कि इनमें से तीन मामलों में 25 लाख रुपए की राशि राज्य सरकार और चौथे मामले में पांच लाख रूपये की राशि का भुगतान रक्षा मंत्रालय करेगा। आयोग ने असम सरकार और रक्षा मंत्रलय को छह से आठ सप्ताह में मुआवजा राशि का भुगतान कर अनुपालन रिपोर्ट देने को कहा है।

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आदेशनुसार 23 जुलाई 2008 को मारे गए पीकू अली, 22 जून 2009 को मारे गए जनवम बसुमत्री व ओखेपत बसुमत्री और 23 फरवरी 2011 को मारे गए मृगांक हजारिका व हिमांशु गोगोई के परिवारों में से प्रत्येक को पांच-पांच लाख रुपये का हर्जाना राज्य सरकार देगी। रक्षा मंत्रालय को नौ जुलाई 2009 को मारे गए रोजित नरजरी उर्फ अबराम के परिवार को हर्जाना देना होगा।

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इन सभी मामलों में असम सरकार और रक्षा मंत्रलय को आयोग ने नोटिस भेजे थे, लेकिन ये दोनों ही आयोग को यह समझाने में असफल रहे कि ये मुठभेड सही थी और संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा फायरिंग किये जाने पर सशस्त्र बलों को आत्मरक्षा के लिए फायरिंग करनी पडी।


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