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तीस्ता सीतलवाड़ और उनके सबरंग ट्रस्ट को मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक पैनल ने यूपीए सरकार के लिए पाठयक्रम की सामग्री बनाने के दौरान धर्म और राजनीति का घालमेल करने और दुर्भावना फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहराया.

पैनल ने पाया कि प्रथम दृष्टया सीतलवाड़ के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए और 153बी के तहत धर्म आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का और राष्ट्रीय अखंडता को लेकर पूर्वाग्रहों से ग्रसित आरोप लगाने एवं दावे करने का मामला बनता है.

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बताया जा रहा है कि पैनल की की रिपोर्ट व्यापक है और यह मामले के हर पहलू को देखती है और रिपोर्ट में कहा गया कदम उल्लंघनों की जिम्मेदारियां तय करने, दुर्भावना और घृणा फैलााने के खिलाफ कार्रवाई करने और योजना में लगाए गए धन की पुन: प्राप्ति के लिए उठाया जा सकता है.’

इस समिति का गठन सीतलवाड़ के करीबी सहयोगी रहे रईस खान पठान के आरोपों की जांच के लिए किया गया था. पठान ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि सबरंग ट्रस्ट के प्रकाशन देश के अल्पसंख्यकों में असंतोष फैलाते हैं और भारत को गलत तरीके से पेश करते हैं और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं.

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