नई दिल्ली | करीब दस महीने पहले प्रधानमंत्री के एक एलान ने पुरे देश में भूचाल ला दिया. प्रधानमंत्री मोदी ने 500 और 1000 के नोटों को बंद करने और नए 500 और 2000 के नोट चलाने का एलान किया. उनका कहना था की देश में अन्दर मौजूद कालेधन को समाप्त करने के लिए नोट बंदी जैसे कदम का सहारा लिया जा रहा है. इससे वो पैसा जो अज्ञात या अवैध स्रोत से अर्जित किया गया है, वो घर पर पड़ा हुआ सड जायेगा.

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मोदी के ये कथन आज भी करोडो हिन्दुस्तानियों के कानो में सुनाई देते है. उस समय मोदी ने केवल 50 दिन का समय माँगा था. उन्होंने कहा था की मुझे 50 दिन दीजिये , इसके बाद मैं आपको आपके सपनो का भारत दूंगा. लेकिन अब मोदी जी 2022 में न्यू इंडिया देने की बात करते है. बरहाल नोट बंदी के बाद चलन से बाहर हुई कितनी मुद्रा बैंकों में जमा हुई, इसके बारे में आरबीआई ने एक आंकड़ा जारी किया था.

अपनी रिपोर्ट में आरबीआई ने बताया की बंद हुई 15.44 लाख करोड़ की करेंसी में से 15.28 लाख करोड़ रूपए वापिस आ गए. आरबीआई ने कुछ दिन पहले ही ये आंकड़े जारी किये है. लेकिन अब इसमें भी थोडा पेंच है. दरसल आरबीआई ने संसदीय समिति के सामने बयान दिया की अभी भी कुछ बंद की गयी करेंसी डाक घरो और बैंकों के चेस्ट में पड़ी है. यह केवल अनुमान है. अभी इसमें और भी सुधार हो सकता है.

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मतलब साफ़ है की यह आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है. उधर जब संसदीय समिति ने आरबीआई से पुछा की कितना कालाधन नोट बंदी की वजह से समाप्त हो गया तो उनका कहना था की इसकी हमें कोई जानकारी नही है. कितना कालाधन, नकदी की अदला बदली में सफ़ेद हुआ , इसकी भी आरबीआई को कोई जानकारी नही है. आरबीआई ने बताया की जो आंकड़ा जारी किया गया है वो एक अनुमान है और जब तक हम इसका सत्यापन नही कर लेते तब तक हम केवल अनुमान ही लगा सकते है.

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