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सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने ‘हिंदुत्व’ पर सुनवाई से इंकार करते हुए हिंदुत्‍व की दोबारा व्‍याख्‍या करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है.

21 साल पहले दिए गए फैसले की समीक्षा करने की मांग तथा ‘‘राजनीति से धर्म को अलग करने’’ को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता तीस्‍ता सीतलवाड़,शामसुल इस्लाम और दिलीप मंडल ने याचिका दाखिल की थी. इस याचिका को लेकर कोर्ट ने का कि  हिंदुत्व’ क्या धर्म है या जीवन शैली, इस बात की सुनवाई नहीं करेंगे. साथ ही 1995 के जजमेंट पर दोबारा विचार नहीं करेंगे. सिर्फ ये तय करेंगे कि क्या धर्म के नाम पर वोट मांगे जा सकते हैं?

CJI ठाकुर ने कहा कि 20 साल पुराने फैसले के बाद 5 जजों की बेंच ने जो रेफरेंस सात जजों की संविधान पीठ में भेजा उसमें यह बात कहां लिखी गई है कि संवैधानिक पीठ को हिंदुत्व की व्याख्या करनी है? फैसले के किसी भी हिस्से में इस बात का जिक्र नहीं है, जिस बात का जिक्र ही नहीं है उस हम कैसे सुन सकते हैं? कोर्ट फिलहाल इस बड़ी बहस में नहीं जा रहा कि हिंदुत्व क्या है और इसका मतलब क्या है?

गौरतलब रहें कि दिसंबर 1995 में कोर्ट ने कहा था कि हिंदुत्‍व के नाम पर वोट मांगना जनप्रतिनिधित्‍व की धारा 126 के तहत गलत प्रक्रिया नहीं है.


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