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कश्मीर हिंसा के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा पेलेट गन के इस्तेमाल पर शनिवार को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए पेलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए.

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनएन पाल वसंथकुमार और जस्टिस मुजफ्फर हुसैन अत्तर की पीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह का संसद में पैलेट गन के विकल्प तलाशने संबंधी बयान ही इसके प्रयोग को रोकने के लिए काफी है.

पीठ ने पैलेट गन से नुकसान का जिक्र करते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी आंखों की रोशनी गंवाता है तो वह सबकुछ गंवा देता है. कोई भी संवेदनशील व्यक्ति अखबारों में सुरक्षाबलों की कार्रवाई में जख्मी बच्चों की तस्वीरें बर्दाश्त नहीं कर सकता. पांच साल के बच्चे को आप पत्थरबाज नहीं कह सकते.

अदालत ने सरकार को लोगों की मदद कर रही स्वयंसेवी संस्थाओं के कामकाज में हस्तक्षेप न करने का निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें रोकने के बजाय प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। एनजीओ को लोगों को खाना देने, दवाएं उपलब्ध कराने से नहीं रोका जाए। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रात में भी दवा दुकानें खुली रहें.

अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि जारी अशांति के दौरान जख्मी लोगों का आवश्यक उपचार किया जाए और जिन्हें विशेष चिकित्सा की जरूरत है उन्हें उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में भेजा जाए. पीठ ने कहा, ‘सुनिश्चित किया जाए कि रोगियों को चिकित्सा दी जाए. उन लोगों को दूसरे अस्पताल में भेजा जाए जिन्हें विशेष चिकित्सा की जरूरत है.’


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