शिमला | हमारे देश में कपड़ो को लेकर हमेशा से चर्चा चलती आई है. किसको कैसे कपडे पहनने चाहिए, यह बड़ा बहस का विषय है. हालंकि देश की कई निजी और सरकारी संस्थाए है जहाँ पहले से परिभाषित कपडे पहनना अनिवार्य है. लेकिन अभी भी काफी संस्थाओ में कपड़ो को लेकर कोई भी नियम कायदे नही बनाये गए है. लेकिन न्यायालय के सम्बन्ध में स्थिति थोड़ी बदल जाती है.

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हालांकि न्यायलय में काम करने वाले कर्मचारी और वकीलो के लिए एक तय परिधान पहले से नियत है लेकिन जो सरकारी अधिकारी या कर्मचारी , न्यायालय के समक्ष पेश होगा, उसको कैसे कपडे पहनकर आने चाहिए, इसलिए लिए अभी तक कोई भी नियम कायदे नही बनाए गए है. लेकिन हिमाचाल हाई कोर्ट ने इसके लिए भी एक नियम बनाने का आदेश दिया है.

दरअसल हिमाचल हाई कोर्ट के समक्ष पेश हुए एक अधिकारी के परिधान न्यायधीशो की खंडपीठ को इतने नागवार गुजरे की उन्होंने प्रदेश के मुख्य सचिव को आदेश दिए वो निर्देश जारी करे की कोर्ट के समक्ष पेश होने वाले अधिकारी और कर्मचारियों उचित परिधान में न्यायलय में हाजिर हो. इसके लिए कोर्ट ने झारखण्ड हाई कोर्ट के आदेश को आधार बनाया.

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न्यायधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायधीश अजय मोहन की खंडपीठ ने यह आदेश तब जारी किया जब एक मामले में पेश हुए कनिष्ठ अभियंता कोर्ट में जींस और रंग बिरंगे परिधान पहनकर पेश हुए. इस पर कोर्ट ने कड़ा एतराज जताया और प्रदेश के मुख्य सचिव को आदेश जारी कर कहा की वो निर्देश जारी करे की किसी भी परिस्थिति में कोई भी पदाधिकारी-कर्मचारी न्यायलय में कैजुअल ड्रेस, फैंसी शर्ट, टी शर्ट , रंगीन चश्मे या रंगीन कपडे पहनकर पेश न हो.

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