नई दिल्ली | पिछले कई महीनो से सुर्खियों में चल रहे तीन तलाक के मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गयी. कोर्ट अगले 10 दिनों तक लगातार इस मामले में सुनवाई करेगा. सुनवाई के दौरान अदालत यह देखेगी की क्या तीन तलाक धर्म से जुड़ा हुआ मामला है या फिर इससे संविधान में निहित कुछ मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है. अगर यह धर्म का मामला नही होगा तभी आगे इस पर सुनवाई जारी रहेगी.

फ़िलहाल कोर्ट ने तीन तलाक और हलाला मामले में सुनवाई करने का फैसला किया है. कोर्ट ने बहुविवाह पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट की पांच सदसीय संवैधानिक पीठ इस मामले में सुनवाई कर रही है. पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस जेएस खेहर कर रही है. संविधान पीठ के सदस्यों में सिख, ईसाई, पारसी, हिन्दू और मुस्लिम सहित विभिन्न धार्मिक समुदाय से हैं.

मामले की सुनवाई शुरू होते ही तीन तलाक के पक्ष में पैरवी कर रहे सलमान खुर्शीद ने कहा की तीन तलाक कोई मुद्दा नही है क्योकि तलाक से पहले पति और पत्नी के बीच सुलह की कोशिश होती है. इसके अलावा यह प्रक्रिया तीन महीने में पूरी होती है. सलमान की दलील पर जस्टिस रोहिंग्टन ने पुछा की क्या तलाक से पहले सुलह की कोशिशे कही कोडीफाईड है. इस पर सलमान खुर्शीद ने नहीं में जवाब दिया.

उधर मुस्लिम पर्सनल बोर्ड की तरफ से दलील दे रहे कपिल सिब्बल ने कहा की यह मुद्दा पर्सनल लॉ से जुड़ा मामला है इसलिए इस पर कोर्ट को दखल नही देना चाहिए. हाँ सरकार इस पर कोई कानून जरुर बना सकती है. कपिल की दलील पर कोर्ट ने कहा की यह मामला मौलिक अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है. उधर केंद्र की ओर से एएसजी पिंकी आनंद ने कहा की तीन तलाक को कई इस्लामिक देश खत्म कर चुके है. यह पूरी तरह से असंवैधानिक है.

फ़िलहाल इस मामले में कोर्ट में सुनवाई चल रही है. इस दौरान कोर्ट ने कहा की यह गंभीर मामला है और इसे टाला नही जा सकता. तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह को लेकर कोर्ट में सात याचिकाए डाली गयी थी जिसमे से पांच याचिकाए मुस्लिम महिलाओं द्वारा डाली गयी है. इस मामले में 15 मई को केंद्र सरकार की और से अटोर्नी जनरल मुकुल रोहतगी पक्ष रखेंगे. केंद्र सरकार पहले ही कह चुकी है की वो किसी की तरफ नही है बस हम लैंगिक अधिकार और महिलाओ के गरिमापूर्ण जीवन के अधिकारों के लिए लड़ रहे है.


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