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बाबरी मस्जिद मामलें के सबसे बड़े पैरोकार हाशिम अंसारी को श्रद्धांजलि देने के लिए सबसे पहले राम जन्मभूमि मंदिर के पुजारी सत्येंद्र दास पहुंचे और उनके बाद हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञानदास आए. 

श्री राम जन्मभूमि के मुख्य अर्जक आचार्य सत्येंद्र दास ने हासिम अंसारी के आवास पर पहुंचकर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की. वहीँ सुबह 8:00 बजे अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञानदास ने हाशिम अंसारी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

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इस मौके पर महंत ज्ञानदास हाशिम के निधन पर बेहद भावुक हो उठे. हाशिम अंसारी के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए महंत ज्ञानदास अपने आंसुओं को रोक नहीं सके और फफक कर रोने लगे. महंत ज्ञानदास ने कहा हाशिम का सपना अधूरा रह गया मेरा एक साथी मुझसे बिछड़ गया उनकी इच्छा थी अयोध्या के विवाद का हल हो लेकिन ऐसा हो न सका आज जो नुकसान अयोध्या का हुआ है उसकी भरपाई नहीं हो सकती.

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हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी को सांत्वना देते हुए महंत ज्ञानदास ने कहा कि उनके पिता ने जो मुहीम शुरू की थी उसको पूरा कर अयोध्या विवाद का हल करना ही हाशिम अंसारी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. महंत ज्ञान दास ने कहा कि अब हाशिम अंसारी के परिवार की ज़िम्मेदारी मेरी है जब भी कभी हाशिम अंसारी के परिवार को किसी भी चीज की जरुरत होगी यह कोई भी विपत्ति हाशिम के परिवार पर आएगी तो सबसे पहले महंत ज्ञानदास उसका सामना करेंगे हाशिम मेरे मित्र थे इसलिए अब उनके परिवार की जिम्मेदारी मेरी बनती है.

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