चंडीगढ़ | पिछले साल 8 नवम्बर को नोट बंदी की घोषणा के बाद बहुत से लोगो ने अपने पुराने नोटों को ठिकाने लगाने के लिए कई रास्ते अपनाये. इनमें से एक रास्ता था अपने कर्मचारियों को पुराने नोटों में तनख्वाह बाँट देना. लेकिन नोट बंदी के निर्देशों के अनुसार सभी पुराने 500 और 1000 के नोटों को बैंक में जमा कराना था. जिसके बदले बैंक को नए नोट जारी करने थे. इसलिए ऐसा न करना भी एक अपराध था.

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लेकिन हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष ने नोट बंदी के निर्देशों की अवेहलना करते हुए पुराने नोटों को बैंक में जमा नही कराया. हरियाणा के पूर्व गृह मंत्री संपत सिंह के विधानसभा अध्यक्ष कंवर पाल सिंह ने नोट बंदी के बाद विधानसभा कर्मचारियों को पुराने 500 और 1000 के नोटों में सैलरी बाँटने का आदेश दिया था. जो एक अपराध है. संपत ने इस मामले में थाने में शिकायत दर्ज कराई है.

चंडीगढ़ के सेक्टर 3 में दर्ज अपनी शिकायत में संपत सिंह ने कहा की आरोपियों ने जानबूझकर नोट बंदी के प्रावधानों की अवेहलना की. हालंकि यह बात विधानसभा अध्यक्ष ने भी मानी है की उन्होंने विधानसभा के 319 कर्मचारियों को पुराने नोटों में सैलरी देने का आदेश दिया था. इस पुरे मामले में संपत सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा के तीन अधिकारियो और हरियाणा के महालेखाकार के एक अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी है.

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कंवरपाल सिंह ने अपनी सफाई में कहा की हमने राज्य के करीब 300 पूर्व विधायको को सम्मानित करने का फैसला किया था. सबको 11 हजार रूपए मानदेय के रूप में देने का फैसला किया गया. इसके लिए विधानसभा बजट से करीब 33 लाख रूपए निकाले गए. जिसमे से केवल 16 लाख 50 हजार रूपए बांटे गए. बाकी बचे 16 लाख 72 हजार रूपए को कर्मचारियों को बाँटने के लिए महालेखकर की और से इजाजत ली गयी. इसमें कुछ भी गलत नही है.

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