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देश भर में कथित गौरक्षकों द्वारा मुस्लिम और दलित समुदाय के लोगों पर हिंसा को लेकर पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी चुप्पी तोड़ी हैं. प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 80 फीसदी गौरक्षकों को फर्जी और असामाजिक कार्यों में लिप्त बताये जाने को लेकर रविवार को काशी सुमेरु पीठ के शंकराचार्य स्‍वामी नरेंद्रांनद सरस्‍वती ने कड़ी निंदा की है.

उन्‍होंने कहा कि मोदी के बयान से गायों की हत्‍या को प्रोत्‍साहन मिलेगा और हत्‍यारों को आ‍र्थिक फायदा होगा. शंकराचार्य ने कहा, ”प्रधानमंत्री के बयान से गायों को मारने वाले लोगों को कुछ आर्थिक फायदा पहुंचा है. क्‍या प्रधानमंत्री नहीं देख सकते कि दिल्‍ली के पांच सितारा होटलों में गाय का मांस बिक रहा है? गाै संरक्षण के विषय पर विश्‍व हिंदू परिषद, गौ संवर्धन परिषद और संघ सबसे ज्‍यादा बात करते हैं, तो क्‍या विश्‍व हिंदू परिषद, राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ और बजरंग दल ही यह दुकानें चलाते रहे हैं?”

सरस्‍वती ने कहा, ”पंजाब में गाय के स्‍तनों में हवा और दूध ठूंसा जा रहा है, क्‍या प्रधानमंत्री को यह नहीं दिखता? एक तरफ, उनकी अंतरात्‍मा कहती है कि वधशालाओं को बंद नहीं किया जाएगा और अब प्रधानमंत्री कहते हैं कि गौरक्षा के नाम पर चल रही दुकानों को बंद किया जाना चाहिए.

उन्होंने प्रधानमंत्री के बयान को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का बयान गायों की हत्‍या को बढ़ावा देता है. गौरक्षा करने वाले दुकानें नहीं चलाते. वे गायों की रक्षा के लिए अपनी जान तक बलिदान कर देते हैं.”


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