मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि रक्षा मंत्री ने हंदवारा और नाथनुसा में प्रदर्शन के दौरान नागरिकों की मौत की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की निश्चित समयसीमा के अंदर जांच कराने का आश्वासन दिया है।

कश्मीर के कई हिस्सों में शनिवार (16 अप्रैल) को भी झड़पें हुईं जिसमें दो युवक घायल हो गए और इसी बीच मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार (12 अप्रैल) से सुरक्षाबलों की गोलीबारी में मारे गए लोगों के परिवारों के पास जाकर तनाव को शांत करने की कोशिश की एवं उन्हें न्याय दिलवाने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं स्वीकार नहीं की जा सकती हैं। कश्मीर के कुछ खास हिस्सों में शनिवार (16 अप्रैल) को भी कर्फ्यू जैसी स्थिति बनी रही और पूरी घाटी में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद रहीं।

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार कुपवाड़ा के त्रेहगाम में सुरक्षाबलों ने पथराव कर रहे प्रदर्शनकारियों पर एक विशेष प्रकार की गोलियां (पेलेट) चलायीं जिसमें दो युवक यावर राशिद और गौहर माजिद घायल हो गए। दोनों को विशेष इलाज के लिए श्रीनगर के एक अस्पताल में ले जाया गया है। अधिकारी के अुनसार नाथनुसा में जब पुलिस ने लांगेट के विधायक शेख अब्दुल राशिद को ड्रमगुला नहीं जाने दिया तब प्रदर्शनकारी सुरक्षाबलों पर पथराव करने लगे।

गांदेरबल जिले के बारसू इलाके से भी प्रदर्शन की खबर है। अधिकारी के अनुसार युवकों ने एक रास्ता जाम कर दिया और पथराव किया। उन्हें खदेड़ा गया। पुलिस अधिकारी के अनुसार बांदीपोरा के नाईडखाई में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के एक वीरान बैरक में आग लगा दी। हाल की बाढ़ के बाद टीन शेड वाले इस बैरक को खाली छोड़ दिया गया था। पुलिस अधिकारी के मुताबिक वैसे तो श्रीनगर का ज्यादातर हिस्सा शांत रहा लेकिन नतिपोरा इलाके में पथराव की मामूली घटना हुई।

इसी बीच, जिस लड़की की कथित छेड़खानी की वजह से कश्मीर में हिंसा का चक्र चला है, उसकी मां ने दावा किया कि उसकी बेटी पर वीडियो में यह बयान देने के लिए दबाव बनाया गया कि उसके साथ छेड़खानी नहीं हुई है। उसकी मां इस घटना की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए अदालत पहुंची। उन्होंने कहा, ‘‘हम नहीं चाहते हैं कि पुलिस या सेना, जिसने यह किया है, इसकी जांच करे।’’

तनाव बने रहने के बीच महबूबा 18 वर्षीय आरिफ हुसैन डार के घर गयीं और उन्होंने उसके परिवार के लोगों को सात्वंना दी। शुक्रवार (15 अप्रैल) को यहां से 100 किलोमीटर दूर कुपवाड़ा के नाथनुसा में सेना ने कैंप पर पथराव कर रही भीड़ पर गोलियां चलायी थी जिसमें आरिफ मारा गया था। मुख्यमंत्री हिंसा में मारे गए अन्य लोगों के परिवारों में भी गयीं। मंगलवार से प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाबलों की गोलीबारी में पांच लोग मारे गए हैं। ये प्रदर्शनकारी कुपवाड़ा के हंदवाड़ा में कथित छेड़खानी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।

एक अधिकारी ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री उन लोगों के रिश्तेदारों से मिलीं जो जिले में मंगलवार (12 अप्रैल) से मारे गए हैं। उन्होंने उनके साथ एकजुटता प्रदर्शित की और आश्वासन दिया कि जांच करायी जाएगी एवं इंसाफ होगा।’’

महबूबा स्थिति का मौके पर आकलन करने के लिए कुपवाड़ा गयीं। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता भी की जिसमें उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह, ग्रामीण विकास मंत्री अब्दुल हक खान, हंदवाड़ा के विधायक सजाद लोन, मुख्य सचिव बी आर शर्मा, पुलिस महानिदेशक के राजेंद्र कुमार एवं वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

महबूबा ने स्पष्ट किया कि सुरक्षाबल द्वारा कानून व्यवस्था की स्थिति से निबटने के दौरान किसी भी नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने शुक्रवार (15 अप्रैल) देर शाम रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर से टेलीफोन पर बातचीत की थी और वे उत्तरी सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डी एच हुड्डा से भी मिलीं। उन्होंने हुड्डा से कहा कि हंदवाडा और नाथनुसा जैसी घटनाएं अस्वीकार्य हैं और राज्य में शांति को ठोस आकार देने की सरकार की कोशिश के लिए एक बड़ा झटका है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैंने जनरल हुड्डा से कानून व्यवस्था की स्थिति से निबटने के दौरान अधिकतम संयम बरतने को कहा है।’’ उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री ने हंदवाडा और नाथनुसा में प्रदर्शन के दौरान नागरिकों की मौत की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की निश्चित समयसीमा के अंदर जांच कराने का आश्वासन दिया है। उन्होंने स्थिति शांतिपूर्ण और सामान्य बनाने में समाज के सदस्यों का सहयोग मांगा।

महबूबा ने कहा, ‘‘मैंने मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण करने के बाद इस तरह कुपवाड़ा आने की कभी कल्पना नहीं की थी। यह बड़ा दुर्भाग्यूपर्ण है।’’ जब मुख्यमंत्री को वर्तमान स्थिति के बारे में बताया गया तो उन्होंने कहा कि मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) महज शब्द न रहे जबकि कानून व्यवस्था से निबटने के लिए प्रभावी उपकरण हो।

स्थिति को लेकर चिंतित केंद्र ने घाटी में 3600 अतिरिक्त अर्द्धसैन्य कर्मियों को भेजने का फैसला किया है और राज्य सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी और की जान न जाए। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुपवाड़ा एवं हंदवाउा शहरों समेत उत्तरी कश्मीर के कुछ हिस्सों में कड़ी पाबंदी लगायी गयी है।

श्रीनगर में महाराजगंज, खन्यार, नौहट्टा, रैनवारी, सफकदाल और मैसूमा थानाक्षेत्रों में भी एहतियात के तौर पर पाबंदी लगायी गयी है। ज्यादातर अलगवादी नेता गिरफ्तार कर लिए गए हैं या फिर नजरबंद कर लिए गए हैं। कश्मीर विश्वविद्यालय ने शनिवार (16 अप्रैल) की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। (jansatta.com)


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