एम्स में भर्ती इंशा मलिक, डॉक्टरों का कहना है कि अब वह शायद कभी नहीं देख सकेगी
इंशा मलिक, जो अब कभी नहीं देख सकेगी

कश्मीर में लोगों पर पैलेट गन चलाने को लेकर चल रहे मामले में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सीआरपीएफ से जवाब मांगा था. सीआरपीएफ ने बुधवार को एक ऐफिडेविट के जरिए कोर्ट को इस मामले में जवाब दिया कि अगर पेलेट गन पर रोक लगाई जाती है, तो ज्यादा मौतें होंगी.

सीआरपीएफ ने दावा किया कि पेलेट गन का प्रयोग बंद होने पर जवानों को गोलियां चलानी पड़ेंगी, जिससे स्थिति और खराब हो सकती है. अपने हलफनामे में सीआरपीएफ ने कहा कि अगर पेलेट गन को हटा लिया जाता है, तो कठिन परिस्थितियों में हमारे सुरक्षाकर्मियों को राइफल से गोली चलानी पड़ेगी. इससे और होने वाली मौतें के बढ़ने की आशंका है.

गौरतलब रहें कि हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर घाटी में शुरू हुए प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल की गई पेलेट गन से घायल हुए लोगों में 50 प्रतिशत ऐसे लोग हैं जिनकी आँखें पेलेट गन की गोलियों से घायल हुई हैं. इनमें से कई लोगों की आंख की रोशनी भी जा चुकी है.

कश्मीरीयों को तितर-बितर करने के लिए CRPF ने कुल 2,102 गोलियां (पेलेट गन से) चलाई हैं. इनसे कुल 317 लोग घायल हुए और उनमें से 50 प्रतिशत लोगों की आंखों में जाकर इस गोली के छर्रे लगे हैं.


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