Gulberg-massacre

Updated News – 

अहमदाबाद: गुजरात दंगों के दौरान हुए गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए 24 आरोपियों को दोषी करार दिया है और 36 को बरी किया गया है। दोषियों की सजा का ऐलान 6 जून को होगा। बीजेपी नेता बिपिन पटेल को बरी किया गया है जबकि अतुल वैद्य को दोषी करार दिया गया है।

24 में से 11 आरोपी को हत्‍या का दोषी पाया गया। वहीं, 13 दोषियों को दूसरे मामले में दोषी ठहराया गया। इस केस में कुल 67 आरोपी थे, जिसमें से कोर्ट ने 36 को बरी कर दिया। 24 दोषियों पर 6 जून को सजा का ऐलान किया जाएगा।कोर्ट ने अपनी टिप्‍पणी में कहा कि गुलबर्ग सोसायटी पर हमला साजिश का हिस्‍सा नहीं है। गुलबर्ग की वारदात रेयरेस्‍ट बता दें कि गुलबर्गा सोसायटी केस में 28 फरवरी, 2002 में 69 लोगों की हत्‍या हुई थी।

36 आरोपियों के बरी होने पर जकिया ने जताया अफसोस
इस फैसले के बाद जकिया जाफरी ने कहा कि 36 आरोपियों के बरी होने पर अफसोस है। आगे भी लड़ाई जारी रखेंगे।  उनकी बहू दुरैया जाफरी ने कहा कि 36 लोगों को किस आधार पर छोड़ा गया। वकीलों से बात करके फैसले को चुनौती देंगे।

क्या हुआ था
28 फरवरी 2002 को हजारों की हिंसक भीड़ ने गुलबर्ग सोसायटी पर हमला कर दिया था। इसमें 69 लोग मारे गए थे, जिनमें पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफ़री भी थे। 39 लोगों के शव बरामद हुए थे और 30 लापता लोगों को सात साल बाद मृत मान लिया गया था।

तत्कालीन मुख्यमंत्री से भी हुई थी पूछताछ
गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में 2010 में पूछताछ हुई थी। एसआईटी रिपोर्ट में उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी। 15 सितंबर 2015 को सुनवाई ख़त्म हो गई थी। पीड़ित परिवार आरोपियों के लिए कड़ी सज़ा की मांग कर रहा है।

14 साल का बेटा अब तक नहीं मिला

गुजरात के अहमदाबाद शहर के मेघाणीनगर इलाके कि गुलबर्ग सोसायटी में 28 फरवरी, 2002  को जो कहर बरपा वो दुख दर्द अब भी भुक्‍तभोगियों की जिंदगी में दिखता है। रूपा मोदी इकलौती पारसी थीं जो पूरी तरह से मुस्लिमों की उस सोसायटी में रहती थीं। उनका 14 साल का बेटा तब से जो गुमशुदा हुआ, वह आज तक नहीं मिला है। उसके आंसू और दर्द थम नहीं रहे हैं। उसकी ज़िन्दगी जैसे 28 फरवरी, 2002 को ही थम सी गई है।

2002 में गुजरात दंगों के दौरान हुए गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में आज फैसला आ सकता है। मामले की निगरानी कर रही सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी कोर्ट को 31 मई को अपना फैसला सुनाने का निर्देश दिया था।

28 फरवरी 2002 को हिंसक भीड़ ने गुलबर्ग सोसायटी पर हमला कर दिया था। इस हमले में 69 लोग मारे गए थे। मृतकों में पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफ़री भी थे। 39 लोगों के शव बरामद हुए थे और 30 लापता लोगों को सात साल बाद मृत मान लिया गया था।

विशेष अदालत के न्यायाधीश पी बी देसाई 22 सितंबर, 2015 से शुरू हुए ट्रायल के आठ महीनों बाद इस मुद्दे पर अपना फ़ैसला देंगे। इस मामले के 66 आरोपियों में से नौ आरोपी अभी भी जेल में हैं जबकि बाकी आरोपी ज़मानत पर जेल से बाहर हैं।

दंगों पीड़ितों के के अनुसार एक पूर्व नियोजित आपराधिक साजिश के तहत गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को मारने के लिए किया गया था।


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment

Related Posts

loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें
SHARE