कथित 2000 मुसलमानों की हत्या के बावजूद अब 2002 का गुजरात दंगा मुस्लिम विरोधी नहीं था. ये कहना है एनसीईआरटी का जो अब अपनी किताबों में इस बाबत बदलाव कर रही है. गुजरात दंगों को स्वतंत्र भारत का मुस्लिम नरसंहार माना जाता है.

ये फैसला कोर्स रिव्यू कमिटी में लिया गया जिसमें एनसीईआरटी के अलावा सीबीएसई के प्रतिनिधि भी शामिल थे. इसे पहले अब तक इन किताबों में इस दंगे को मुस्लिम विरोधी दंगा कहा जाता था. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार एनसीईआरटी के अधिकारियों ने कहा कि सीबीएसई की ओर से उठाए गए प्वाइंट्स को अपना लिया गया है.  इन बदलावों को साल के इस अंत तक किताबों पर लागू कर दिया जाएगा.

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नसीईआरटी के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि किताब में बदलाव का मुद्दा सीबीएसई ने उठाया था. साल के अंत में जब दोबारा पुस्तकें छपेंगी तो उसमें यह बदलाव दिखेगा. दरअसल एनसीईआरटी की 12वीं कक्षा की पॉलिटिकल साइंस की किताब जिसका शीर्षक है ‘Politics In India Since Independence….’।  इसके पेज नंबर 187 पर Anti-Muslim riots in Gujarat” हेडिंग के साथ गुजरात दंगों पर जानकारी थी.

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आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक, वर्ष 2002 के फरवरी-मार्च महीने में हुए इस दंगे के दौरान करीब 800 मुस्लिम और 250 हिंदू लोग मारे गए थे. हालांकि मरने वालों की संख्या इसे कही ज्यादा थी.


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