नई दिल्ली | केन्द्रीय सूचना आयोग ने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के हत्यारे, नाथूराम गोडसे की गिरफ़्तारी के बाद दिए गए बयान को सार्वजनिक करने का आदेश दिया है. इसके अलावा गोडसे के बयान सहित अन्य सभी रिकॉर्ड को राष्ट्रीय अभिलेखागार की वेबसाइट पर अपलोड करने का भी निर्देश दिया है. केन्द्रीय सूचना आयोग ने , एक आरटीआई एक्टिविस्ट की याचिका पर यह फैसला सुनाया.

सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान राष्ट्रिय अभिलेखागार को आदेश दिया की वो नाथूराम गोडसे के , महात्मा गाँधी की हत्या के बाद दिए गए बयान और अन्य सभी रिकॉर्ड को अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करे. श्रीधर ने अपने आदेश में कहा की हम उनके विचारो का खुलासा करने से इनकार नही कर सकते.

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श्रीधर ने आदेश में कहा की न ही नाथूराम गोडसे और न ही कोई और व्यक्ति जो उनके सिद्धांत और विचारो को मानता हो, किसी के विचारो और सिद्धांतो से असहमत होकर उसकी हत्या करने की हद तक नही जा सकता. श्रीधर ने आगे कहा की चूँकि मांगी गयी सूचना 20 साल से ज्यादा पुरानी हो चुकी है और यह आरटीआई कानून के 8:1:ए: एक्ट के तहत नही आती तो इसे गोपनीय भी नही रखा जा सकता.

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दरअसल आरटीआई एक्टिविस्ट आशुतोष बंसल ने दिल्ली पुलिस में आरटीआई लगाकर गाँधी जी की हत्या के समय लगाए गए आरोपपत्र और गोडसे के बयान सहित कई अन्य जानकारी मांगी थी. बंसल की आरटीआई को दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रिय अभिलेखागार को प्रेषित करते हुए कहा की हमने सभी रिकॉर्ड उनको सौप दिए है. राष्ट्रिय अभिलेखागर ने जवाब में बंसल को सभी रिकॉर्ड स्वयं देखकर सूचनाये प्राप्त करने को कहा. इससे संतुष्ट नही होते हुए बंसल ने सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया.

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