नई दिल्ली | संजय लीला भंसाली की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘पद्मावती’ पर विवाद गहराता जा रहा है. राजपूत संगठन ‘राजपूत करणी सेना’ के बाद अब सियासी लोग भी फिल्म के विरोध में आते दिख रहे है. केन्द्रीय मंत्री उमा भारती ने संजय लीला भंसाली पर एतिहासिक तथ्यों से छेडछाड करने का आरोप लगाते हुए कहा की मुग़ल बादशाह अलाउद्दीन खिलजी की बुरी नजर रानी पद्मावती पर थी.

उमा भारती ने एक खुले पत्र के जरिये फिल्म पर अपनी भड़ास निकाली. उन्होंने कहा की तथ्य को बदला नहीं जा सकता, उसे अच्छा या बुरा कहा जा सकता है. आप किसी ऐतिहासिक तथ्य पर फिल्म बनाते हैं तो उनके साथ छेडछाड नहीं कर सकते. उमा भारती के बाद एक और केन्द्रीय मंत्री ने संजय लीला भंसाली पर कुछ इसी तरह के आरोप लगाए है. उन्होंने इस विवाद को हिन्दू मुस्लिम के साथ जोड़ते हुए फिल्म निर्माताओ को चुनौती तक दे डाली.

केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने संजय लीला भंसाली पर भड़कते हुए कहा की क्या संजय लीला भंसाली या किसी अन्य में इतनी हिम्मत है की वो किसी और धर्म के ऊपर फिल्म बनाने या टिप्पणी कर सके? वो केवल हिन्दू गुरुओ, देवी देवताओ और योद्धाओ पर फिल्म बनाते है. अगर पद्मावती हिन्दू न होती तो शायद ही कोई इस पर फिल्म बनाने की हिम्मत दिखाता. मेरा मानना है की फिल्म में एतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ कर मुद्दे को विवादस्पद बनाया गया है.

गिरिराज सिंह ने आगे कहा की इतिहास इस बात का गवाह है की पद्मावती ने खुद को मिटा दिया लेकिन मुगलों के आगे घुटने नही टेके. इसलिए जो लोग इतिहास से खिलवाड़ कर रहे है उन्हें जनता खुद सजा देगी. मालूम हो की गिरिराज इससे पहले भी ऐसा बयान दे चुके है. उन्होंने कहा था की कुछ ऐसे लोग जो टिपू सुल्तान और औरंगजेब को अपना आदर्श मानते है वो देश के इतिहास के साथ खिलवाड़ कर रहे है.


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