भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की स्मृति में उनके जन्मदिवस पर एक प्रतिमा लगाई गई थी. ये प्रतिमा कलाम के गृहनगर पीकारूंबू में लगाई गई थी. प्रतिमा लगाने को लेकर पहले से ही विवाद जारी था. लेकिन अब एक और विवाद हो गया है.

दरअसल प्रतिमा में कलाम के हाथों में वीणा थमा दी गई तो साथ ही उनके बगल में गीता रखी गई है. ऐसे में बीजेपी पर कलाम को भी भगवा रंग में रंगने की कोशिश करने का आरोप लगा. ये आरोप एमडीएमके नेता वाइको ने लगाया. साथ ही कलाम के परिजनों ने भी इस पर आपत्ति की.

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डीएमके नेता स्टालिन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, कलाम की प्रतिमा के पास भगवद्गीता की मौजूदगी सांप्रदायिकता थोपने की एक कोशिश है. स्टालिन ने सवाल किया कि वहां तिरुक्करल (तमिल का महान ग्रन्थ) के अंश क्यों नहीं हैं? वीसीके नेता तिरुमवलन ने कहा, ‘कलाम की प्रतिमा के पास भगवद्गीता को जगह देकर कहीं कलाम को हिंदू धर्म के महान प्रेमी के रूप में पेश करने की मंशा तो नहीं है? इससे मुस्लिमों का भी अपमान हुआ है, इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए.’

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एमडीएमके नेता वायको ने पूछा, ‘क्या भगवद्गीता तिरुक्करल से ज्यादा महान ग्रन्थ है? कलाम ने ग्रीस की संसद में संबोधन के दौरान तिरुक्करल से ही पंक्तियां उद्धरित की थीं। उन्होंने इस ग्रन्थ से ही ‘हर देश मेरा देश है और सब मेरे परिजन हैं’ पंक्तियों को अपने संबोधन में इस्तेमाल किया था। हमें अच्छे से पता है कि बीजेपी इन तरीकों से क्या करना चाह रही है?’

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हालांकि अब विवाद को रफा दफा करने के लिए प्रतिमा लगवाने वाली संस्था ने दावा किया कि कलाम को वीणा से खास लगाव था इसलिए वीणा के साथ उनकी मूर्ति लगाई गई. वहीं गीता रखने पर हुए विवाद को निपटाने के लिए अब कुरान और बाइबिल भी रखवा दी गई है.


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