जाने-माने अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने कहा है कि वह भारत से नहीं बल्कि भारतीय शासन प्रणाल से निराश हैं। हमारे सहयोगी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने डिवेलपमेंट और गवर्नेंस समेत तमाम मुद्दों पर बात की।

सेन ने कहा कि उनके मन में भारत के विकास को लेकर एक अलग विचार है और वह बुनियादी मुद्दों से जुड़ा है। उन्होंने कहा,’देश में मौजूदा समस्याओं की ओर किसी का ध्यान नहीं है बल्कि सेक्युलरिजम और धार्मिक सहिष्णुता जैसे मुद्दों को ज्यादा अहमियत दी जा रही है। देश में प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं नदारद हैं।’

और पढ़े -   मोदी के भाषण पर उमर अब्दुल्ल्ला का तंज कहा, उम्मीद है उनकी दलील सुरक्षा बलों के लिए भी

अमर्त्य सेन ने कहा कि अक्सर लोग समझते हैं कि मैं यूपीए का समर्थक हूं लेकिन सच तो यह है कि मैंने उनकी आलोचना की। भारतीय अर्थव्यवस्था के ग्रोथ के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा,’इंडिया जिन सेक्टरों में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है वे सामान्य लेबर फोर्स पर निर्भर नहीं हैं जैसे कि आईटी, फार्मा और ऑटो सेक्टर। जहां साधारण लेबर फोर्स है वहां हालत खराब है।’

मनरेगा योजना में बदलाव में पूछे जाने पर सेन ने कहा कि वह बदलाव के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा,’मैंने कभी नहीं रहा कि मनरेगा एक बेकार योजना है। इसने कुछ न कुछ अचीव ही किया। अब अगर मौजूदा सरकार को लगता है कि वह इसे ज्यादा असरदार और दोषरहित बना सकते हैं तो यह अच्छी बात है। जो चीजें गरीबों को दी जाती हैं, उन पर हमेशा ही सवाल उठाए जाते हैं क्योंकि आवाज सिर्फ अमीरों और मिडिल क्लास की सुनी जाती है, गरीबों की नहीं।’

और पढ़े -   देखे तस्वीरें: देश भर के मदरसों में बड़ी शान से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

सेन ने कुकिंग गैस से सब्सिडी खत्म करने के मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की। उन्होंने कहा,’इस सरकार ने कुछ बहुत ही अच्छे फैसले लिए हैं। मैं उनका स्वागत करता हूं। जब लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या मैं भारत से निराश हूं तो मैं कहता हूं कि मैं भारत से नहीं बल्कि भारत की शासन प्रणाली से निराश हूं।’

और पढ़े -   15 अगस्त पर यूपी के 8 हजार मदरसों की होगी वीडियोग्राफी , मुस्लिमो ने जताया एतराज

नालंदा यूनिवर्सिटी के बारे में उनके अनुभव पूछे जाने पर उन्होंने कहा,’मैं आपको बताता हूं कि मैं क्यों हट गया। मैं हटा क्योंकि सरकार मुझे वहां नहीं रहने देना चाहती थी। अगर मैं वहां रहता तो हो सकता है यह मेरे इगो के लिए अच्छा होता लेकिन यह नालंदा के लिए अच्छा न होता। सरकार मेरे हर फैसले में अड़चन डाल रही थी।’ (नवभारत टाइम्स)


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE