kashmir

हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की मौत पर कश्मीर में स्थिति हद ने ज्यादा तनाव पूर्ण होती जा रही है कश्मीरी अख़बारों में पिछले दिनों से पहले पन्ने पर सिर्फ यही खबर प्रकाशित की जा रही है अंग्रेज़ी अख़बार ‘राइज़िंग कश्मीर’ ने अपने संपादकीय में लिखा है, “मृत लोगों और घायल हुए लोगों की संख्या परेशान करने वाली है… नागरिकों की हत्या अस्वीकार्य है और सेना और प्रशासन की ओर से ऐसी कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं हो सकता.”

वही अख़बार इस बात पर जोर देते हुए कहता है की आर्मी निहत्थे और चरमपंथी में कोई भेद नही कर रही है और मरने वाले लोगो की संख्या देखकर शांति की बात दूर नज़र आती है

अख़बार ‘ग्रेटर कश्मीर’ ने अपने संपादकीय में लिखा है, “जैसा कि पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, नब्बे के दशक के बाद पहली बार मस्जिदों से आज़ादी के नारे दिए जा रहे हैं. इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों की हत्याओं का कोई औचित्य नहीं है.”

अख़बार आगे सवाल पूछता है कि क्यों “सुरक्षाकर्मी निहत्थे प्रदर्शकानरियों से निपटने में असमर्थ रहते हैं और भीड़ को संभालने के बजाए लोगों को मारना उन्हें आसान रास्ता नज़र आता है.”

अख़बार लिखता है, “ये आश्चर्य की बात है कि अगर इसी तरह के प्रदर्शन भारत के दूसरे हिस्सों में होते हैं तो उनसे पेशेवर तरीके से निपटा जाता है और किसी की मौत नहीं होती जैसी (कश्मीर) घाटी में होती है.”


लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

Facebook Comment

Related Posts

loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें