• कम रेंज वाले उपकरणों को दे दी हरी झंडी
  • आवाज की जगह अहसास तक सीमित भूमिका
  • ड्राइवर-गार्ड की संवादहीनता की शिकायत पर खुली पोल

रेल यात्रियों की संरक्षा और सुरक्षा के लिए ट्रेन ड्राइवर और गार्ड के बीच ज्यादा से ज्यादा संवाद की अहमयित स्वीकारते हुए जिन उम्मीदों से लोको पायलट (ड्राइवर) और गार्ड को वॉकी टॉकी से जोड़ा गया था, वो उम्मीदें पहले कदम पर ही धराशाई हो गईं।

fraud in purchase of walkie-talkie in railwayएनआईआर में वॉकी टॉकी की खरीद के पहले चरण में ही गंभीर लापरवाही सामने आई है। जिन वॉकी टॉकी को डेढ़ किलोमीटर की रेंज में प्रभावी मानकर रेलवे के रनिंग स्टाफ को थमाया गया वे सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर ही जवाब दे गए। जांच में उपकरणों की खरीद के समय गड़बड़ी की बात सामने आई तो सप्लाई देने वाली एजेंसी पर कार्रवाई की जगह उपकरण वापस करने का रास्ता अपनाकर मामले में लीपापोती की तैयारी की जा रही है।

एनईआर सूत्रों के मुताबिक वॉकी टॉकी की खरीद दिसंबर 2015 में पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल से की गई थी। 50 वॉकी टॉकी परिचालन विभाग और 75 अन्य कामों में इस्तेमाल के लिए मंगाए गए थे। फर्म ने 125 वॉकी टॉकी की सप्लाई कर दी और जनवरी 2016 से इन्हें इस्तेमाल के लिए कर्मचारियों के सुपुर्द कर दिया गया। जब इनका इस्तेमाल शुरू हुआ तो शंटर और लोको पायलट ने अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई की वॉकी टॉकी की रेंज कम है।

जरा सी दूरी बढ़ते ही संपर्क टूट जाने से संवाद नहीं हो पाता। इसके बाद रेल प्रशासन ने यांत्रिक, संकेत व दूर संचार और परिचालन विभाग की संयुक्त टीम बनाकर इसका परीक्षण कराया। टीम ने शिकायत को सही बताते हुए रिपोर्ट में लिखा कि रेंज कम होने के चलते वॉकी टॉकी इस्तेमाल के लायक नहीं है।

बताते हैं कि इस रिपोर्ट के बाद वॉकी टॉकी सप्काई देने वाली फर्म को वापस कर दिए गए लेकिन अधोमानक उपकरणों के कर्मचारियों के हाथों तक पहुंचने में हुई गड़बड़ी और नियमों की अनदेखी को लेकर कार्रवाई की सुगबुगाहट देखने को नहीं मिली है। चर्चा है कि उसी फर्म से अब मानक के अनुरूप वॉकी टॉकी की नई सप्लाई की उम्मीद लगाई जा रही है।

‘शिकायतों पर सत्यापन कराया गया तो वॉकी टॉकी की रेंज कम मिली। सप्लाई करने वाली फर्म का कहना था कि रेलवे की एजेंसी राइट्स ने उसे एप्रूव किया है। कम क्षमता के कारण सभी उपकरण वापस करा दिए हैं। राइट्स को पत्र लिखकर मामले से अवगत कराते हुए कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।’ -संजय यादव, सीपीआरओ एनईआर

(अमर उजाला)


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