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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 8 नवंबर रात 12 बजे से 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा के बाद देश में अफरा-तरफी का माहोल हैं. देश की जनता को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं. इस फैसले को लेकर पीएम को विपक्ष सहित कई लोगों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा हैं. आलोचना करने वालों में पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन भी शामिल हैं.

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जानकारी के मुताबिक रघुराम राजन नोटबंदी के पक्ष में नहीं थे, लेकिन पीएम मोदी को कुछ अन्य वरिष्ठ नौकरशाहों का समर्थन हासिल था, जिसकी वजह से उन्होंने ये बड़ा फैसला ले लिया. साल 2014 में उन्होंने इस पर अपनी राय रखते हुए कहा था कि “चालाक लोग इससे बचने का रास्ता निकाल लेंगे.” राजन के अनुसार इससे बचने का एक तरीका ये हो सकता है कि जिन लोगों ने बड़े नोट इकट्ठे कर रखे हैं वो उन्हें छोटे नोटों में बदल लें जिससे उन्हें बदलना आसान हो जाएगा.

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इसके अलावा राजन ये भी मानते हैं कि नोटबंदी किए जाने पर कालाधन रखने वाले बड़े नोटों से सोना खरीद सकते हैं जिसे पकड़ना और मुश्किल हो जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि सरकार को विमुद्रीकरण के बजाय भारतीय कर व्यवस्था को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए.

ब्लैकमनी को लेकर उन्होंने कहा, “मैं लेन-देन पर ज्यादा निगरानी रखने और जहां लोग अपनी आय घोषित नहीं कर रहे हैं वहां बेहतर कर प्रबंधन पर जोर देता है. मेरे ख्याल से आधुनिक अर्थव्यवस्था में पैसे छिपाना आसान नहीं है.

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