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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी के फैसले पर आलोचनात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि नोटबंदी के फैसले से आम आदमी परेशान हो रहे हैं. इसके बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि इस फैसले का अंतिम परिणाम क्या आयेगा. पूर्व प्रधानमंत्री ने आशंका जताते हुए कहा कि इस फैसले से हमारी जीडीपी दो प्रतिशत तक का नुकसान होगा.

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ने नोटबंदी को लेकर हो रही मौतों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि 60-65 लोगों ने अपनी जान गंवा दी, सिंह ने इस बारें में आगे कहा कि मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री इस समस्या से जूझ रहे लोगों को राहत पहुंचाने के लिए व्यावहारिक तरीके ढूंढने में मदद करेंगे.

राज्यसभा में मनमोहन सिंह ने नोटबंदी को ‘संगठित और कानूनी लूट मार’ बताते हुए कहा कि ‘मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहता हूं कि वह किसी ऐसे देश का नाम बताएं, जहां लोगों ने बैंक में अपना पैसा तो जमा कराया, लेकिन वे उसे निकाल नहीं सकते. यह फैसला बिल्कुल गलत है.’

उन्होंने आगे कहा कि कृषि, असंगठित क्षेत्र और लघु उद्योग नोटबंदी के फैसले से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और लोगों का मुद्रा व बैंकिंग व्यवस्था पर से विश्वास खत्म हो रहा है. उन्होंने इस फैसले को लागू करने में बड़े स्तर पर कुप्रबंधन होने का दावा करते हुए कहा कि नियमों में हर दिन हो रहा बदलाव प्रधानमंत्री कार्यालय और भारतीय रिजर्व बैंक की खराब छवि दर्शाता है.

सिंह ने आगे कहा कि इस योजना को जिस तरह से लागू किया गया, वह प्रबंधन के स्तर पर विशाल असफलता है. यहां तक कि यह तो संगठित और कानूनी लूट-खसोट का मामला है.


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