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आप सभी को जानकर आश्‍चर्य होगा कि पिछले 11 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट में कोई भी मुस्लिम जज नहीं है. करीब तीस साल में ये दूसरा मौका है जब सुप्रीम कोर्ट में कोई मुस्लिम जज नहीं है. इसके पहले 2012 में सुप्रीम कोर्ट में किसी मुस्लिम जज की नियुक्ति हुई थी.

इस साल दो मुस्लिम जज दो फरवरी को जस्टिस एम वाई इकबाल और 22 जुलाई को जस्टिस फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलिफुल्ला के रिटायर हो गए, जिसके बाद ऐसी स्थिति बनी है. मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच जजों की नियुक्ति को लेकर चल रहे तनाव के कारण अगले मुस्लिम जज की नियुक्ति रुकी हुई है.

हालांकि फिलहाल देश के दो हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मुस्लिम हैं. जस्टिस इकबाल अहमद अंसारी बिहार हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं और अगले साल अक्टूबर में रिटायर होंगे. जस्टिस सी जे मंसूर अहमद मीर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं और अप्रैल 2017 में रिटायर होंगे.

इंडियन एक्स्प्रेस की खबर के मुताबिक भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णनन ने इस पर चिंता भी जताई. साथ ही उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि जल्‍द ही अदालत को मुस्लिम जज मिल जाएंगे.

सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो चुके 196 और मौजूदा 28 जजों में कुल 17 (7.5 प्रतिशत) जज मुस्लिम रहे हैं. चार मुस्लिम जज जस्टिस एम हिदायतुल्लाह, जस्टिस एम हमीदुल्लाह बेग, जस्टिस एएम अहमदी और जस्टिस अलतमस कबीर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं.

सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जस्टिस एम फातिमा बीवी जज भी एक मुस्लिम थीं. उन्होंने 6 अक्टूबर 1989 से 29 अप्रैल 1992 तक सुप्रीम कोर्ट में अपनी सेवाएं दी थीं.


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