कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के शासनकाल में कई ऐसे आर्थिक मुद्दे थे जिसका उस समय विपक्ष में रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) विरोध किया करती थी. इनमें ‘गुड्स एन्ड सर्विसेस टैक्स’ यानी ‘जीएसटी’ और आधार कार्ड प्रमुख थे.

भाजपा ने यूपीए सरकार को कालाधन मामले पर घेरते हुए वादा किया था कि अगर उसकी सरकार बनती है तो 100 दिन के अंदर काला धन विदेशों से भारत लाया जाएगा.

इस तरह धन जमा करने वालों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई भी की जाएगी. मगर इस बार आम बजट में कालाधन जमा करने वालों के लिए ‘एमनेस्टी’ का प्रावधान किया गया है.

काला धन: बीजेपी ने 2014 के लोकसभा के चुनाव में वादा किया था कि केंद्र में अगर वो सरकार बनाती है तो 100 दिन के अंदर विदेशों में रखा गया कला धन वापस भारत लाएगी और हर ग़रीब को 15-20 लाख रुपए मिल जाएंगे.

हालांकि पार्टी के एक बड़े नेता ने बाद में इसे ‘चुनावी जुमला’ बताया था.

लेकिन 2016-17 के लिए पेश आम बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने घोषणा की कि जिन लोगों के पास अघोषित संपत्ति है वो 45 फ़ीसद टैक्स देकर क़ानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं. यह योजना 1 जून 2016 से 30 सितम्बर 2016 तक लागू रहेेगी.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा में काले धन को सफेद करने की इस योजना को ‘फेयर एंड लवली योजना’ करार दिया था.

मनरेगा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) कांग्रेस सरकार की असफलता का जीता जागता स्मारक बताया था.


मगर बजट में इस योजना के लिए सरकार ने 38,500 करोड़ रूपए आवंटित किए हैं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना को राष्ट्रीय गौरव का कार्यक्रम तक बताया.

आधार कार्ड : बीजेपी ने भारतीय विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईडीएआई) यानी आधार के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर चिंता जताई थी.


उसने कहा था कि विशिष्टता किसी की पहचान की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी शर्त नहीं हो सकती.

मगर 2016-17 आम बजट में एक प्रस्ताव है जिसमें सब्सिडी और दूसरे सरकारी लाभ के लिए आधार कार्ड का होना अनिवार्य किया गया है.

जीएसटी बिल : कांग्रेस अपने शासनकाल में ‘गुड्स एन्ड सर्विसेस टैक्स’ यानी ‘जीएसटी’ लागू करना चाहती थी मगर बीजेपी संसद और उसके बाहर इसका विरोध करती रही. बीजेपी ने इस बिल को मानसून सत्र में लोकसभा से पास करवा लिया.

अब यह राज्यसभा में यह अटका पड़ा है. जीएसटी के लागू होने की सूरत में उत्पाद शुल्क और सर्विस टैक्स सहित केंद्र और राज्यों के परोक्ष कर समाप्त हो जाएंगे और पूरे देश में एक प्रोडक्ट लगभग एक ही क़ीमत पर मिलने लगेगा.


ईपीएफ पर टैक्स : अरुण जेटली ने मंगलवार को कर्मचारी भविष्य निधि से पैसे निकालने पर कर लगाने का प्रस्ताव वापस लेने की घोषणा की. उन्होंने यह प्रस्ताव बजट पेश करते हुए किया था. जेटली ने कहा कि वह इस नीति की समीक्षा करेंगे.

सरकार ने बजट के दौरान ईपीएफ़ से पैसा निकालते समय उसके 60 फ़ीसदी हिस्से पर कर लगाने की घोषणा की थी. इसका व्यापक विरोध हुआ था. राजस्व सचिव ने कहा था 1 अप्रैल, 2016 के बाद ये कर कर्मचारियों की तरफ़ से जमा कराए गए पैसे के 60 फ़ीसद हिस्से पर मिलने वाले ब्याज पर लागू होगा.


लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

कमेंट ज़रूर करें