इटावा | उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद से कई महत्तवपूर्ण निर्णय लिए गये है. एंटी रोमियो स्क्वाड के गठन से लेकर किसानो की कर्ज माफ़ी करने जैसे निर्णय , सरकार बनने के एक महीने के अन्दर ही ले लिए गये. लेकिन कुछ ऐसे विभाग अभी भी है जहाँ बेहद सुधार करने की जरुरत है. इनमे सरकारी अस्पतालों की हालत और प्रशासन सुधारना के बहुत बड़ी चुनौती है.

हालाँकि प्रदेश में लोगो को त्वरित इलाज मुहैया कराने के लिए मुफ्त एम्बुलेंस सेवा की सुविधा दी जा रही है लेकिन अस्पताल प्रशासन की मनमर्जी की वजह से इस सुविधा का लाभ जरुरत मंदों को नही मिल पा रहा है. इसकी बानगी इटावा में देखने को मिली जहाँ एक पिता को अपने बेटे का शव सिर्फ इसलिए कंधे पर उठाकर घर ले जाना पड़ा क्योकि अस्पताल वालो ने एम्बुलेंस मुहैया कराने से मना कर दिया था.

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अभी कुछ महीने पहले उड़ीसा के दानी मांझी की तस्वीर आज तक हमारे जेहन में जिन्दा है. इस तस्वीर में एक शख्स अपनी पत्नी के शव को कंधे पर उठाये पैदल चल रह है. कुछ ऐसी ही तस्वीर इटावा में भी देखने को मिली. दरअसल इटावा से 7 किलोमीटर दूर एक गाँव में रहने वाले उदयवीर के 15 वर्षीय बेटे पुष्पेन्द्र के पैरो में दर्द था. इसलिए वो अपने बेटे का इलाज कराने इटावा के जिला अस्पताल पहुंचे.

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लेकिन यहाँ डॉक्टर ने पुष्पेन्द्र को मृत घोषित कर दिया. उदयवीर का आरोप है की डॉक्टर्स ने बिना देखे उसके बेटे को मृत घोषित कर दिया और जल्द से जल्द अस्पताल से चले जाने के लिए कहा. अस्पताल के इस रवैये से आहत उदयवीर ने अपने बेटे के शव को कंधे पर रखा और परिसर से बाहर निकल गया. उनका आरोप है की अस्पताल प्रशासन ने बेटे को शव को गाँव ले जाने के लिए एम्बुलेंस देने से भी मना कर दिया.

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