लोन डिफॉल्टर्स के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) और केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई से पूछा कि आखिर आप लोग लोन की रकम ना चुकाने वाले लोगों से वसूली के लिए कौन से कदम उठा रहे हैं?

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सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तियों और कंपनियों पर बैंकों की कुल लाखों करोड़ रुपए की बकाया राशि के बारे में रिजर्व बैंक द्वारा सील बंद लिफाफे में उपलब्ध कराई गयी जानकारी सार्वजनिक किए जाने की मांग पक्ष में दिखा, लेकिन आरबीआई ने गोपनीयता के अनुबंध का मुद्दा उठाते हुए इसका विरोध किया.

कोर्ट ने मंगलवार को दाखिल प्रशांत भूषण की याचिका पर सुनवाई में करते हुए कहा कि लोग सरकारी बैंकों से हजारों करोड़ लोन लेकर डिफॉल्टर हो जाते हैं और कंपनियों को बंद कर देते हैं और खुद दिवालिया घोषित कर देते हैं. वहीं, कई गरीब किसान हैं जो थोड़ा सा पैसा उधार लेते हैं और उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाती है.

मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर और न्यायमूर्ति आर भानुमति ने कहा कि इस सूचना के आधार पर एक मामला बनता है. इसमें उल्लेखनीय राशि जुड़ी है. गौरतलब है कि आरबीआई की ओर से इसका विरोध किया गया. केंद्रीय बैंक ने कहा कि इसमें गोपनीयता का अनुबंध जुड़ा है तथा इन आंकड़ों को सार्वजनिक कर देने पर उसका अपना प्रभाव पड़ेगा. पीठ ने कहा कि यह मुद्दा महत्वपूर्ण है.

कोर्ट ने कहा कि वह इसकी जांच करेगा कि क्या करोडों रुपए के बकाए राशि का खुलासा किया जा सकता है. साथ ही इसने इस मामले जुड़े पक्षों से विभिन्न मामलों को उन विभिन्न मुद्दों को निर्धारित करने को कहा जिन पर बहस हो सकती है.

पीठ ने इस मामले में जनहित याचिका का दायरा बढ़ा कर वित्त मंत्रालय और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन को भी इस मामले में पक्ष बना दिया है. इस पर अगली सुनवाई की तारीख 26 अप्रैल को होगी. यह याचिका स्वयंसेवी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) ने 2003 में दायर की थी.

पहले इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के आवास एवं नगर विकास निगम (हुडको) द्वारा कुछ कंपनियों को दिए गए राशि का मुद्दा उठाया गया था. याचिका में कहा गया है कि 2015 में 40,000 करोड़ रपए के रिण को बट्टे-खाते में डाला गया था.

कोर्ट ने रिजर्व बैंक से छह सप्ताह में उन कंपनियों की सूची मांगी है जिनके रिणों को कंपनी रिण पुनर्गठन योजना के तहत पुनर्निधारित किया गया है. पीठ ने इस बात पर हैरानी जताई कि पैसा न चुकाने वालों से वसूली के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए. (hindi.pradesh18.com)


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