नासिक | किसानो की कर्ज माफ़ी और फसलो के वाजिब दाम मिलने की मांग को लेकर पिछले आठ दिनों से आन्दोलन कर रहे महाराष्ट्र के किसानो ने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस को दो तुक शब्दों में कहा है की जब तक उनकी मांगे पूरी नही होती वो आन्दोलन खत्म नही करेंगे. इसके अलावा किसानो ने देवेन्द्र फडनवीस के उस बयान की भी आलोचना की जिसमे उन्होंने कहा था की सभी किसानो का कर्ज माफ़ करना संभव नही है.

गुरुवार को फडनवीस का बयान आने के बाद नासिक में किसान इकठ्ठा हुए और अगली रणनीति पर विचार विमर्श किया गया. बैठक में फैसला लिया गया की जब तक सरकार उनकी सभी मांगे नही मान लेती तब तक हड़ताल को वापिस नही लिया जाएगा. इसके अलावा फडनवीस के बयान की आलोचना करते हुए किसानो ने कहा की सरकार के पास सरकारी कर्मचारियों के वेतन और सुख सुविधाओ के लिए पैसे है लेकिन किसानो के लिए नही.

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किसानो के लिए पुरे प्रदेश में साइकिल चलाने वाले किसान सदाशिव सत्तावजी शिंदे ने बिज़नस स्टैण्डर्ड से बात करते हुए कहा की वो लोग जो सरकारी सुख सुविधाओ के साथ जी रहे है उन्हें हमारा दर्द समझ नही आएगा. ऐसा तभी हो सकता है जब मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और सभी सरकारी कर्मचारियों के भत्ते और सुख सुविधाए खत्म नही हो जाती. सरकार कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग का गठन करती है और उनके वेतन और भत्ते बढ़ाती है.

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शिंदे ने आगे कहा की सरकार के पास कर्मचारीयो के वेतन और सुख सुविधाओ के लिए पैसे है लेकिन किसानो की फसलो के उत्पादन के लिए न्यूनतम लागत देने वाली स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशे लागु करने के पैसे नही है. एक अन्य किसान ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा की लोकसभा और विधानसभा चुनावो के दौरान उन्होंने किसानो से बहुत सारे वादे किये लेकिन सरकार बनते ही वो हमें भूल गए. सीमा पर जवान और खेत में किसान मर रहा है. कहाँ है जय जवान जय किसान का नारा? कौन करेगा हमारे हितो की बात?

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बताते चले की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडनवीस ने किसानो के प्रतिनिधिमंडल से मिलकर 30 हजार करोड़ रूपए का किसानो का ऋण माफ़ करने की घोषणा की थी लेकिन किसान इससे संतुष्ट नही हुए. किसानो से बात नही बनने के बाद फडनवीस ने एक बयान जारी कर कहा की सभी किसानो का कर्ज माफ़ नही किया जा सकता. मुख्यमंत्री के इस बयान से नाराज किसानो ने सीएम की आलोचना करते हुए कहा की मुख्यमंत्री और पीएम को तुरंत अपने सभी भत्ते और सुख सुविधाओ का त्याग कर देना चाहिए.


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