एक अध्ययन से पता चला है कि प्रथम विश्वयुद्ध में मित्र राष्ट्रों की तरफ से 885,000 मुसलमान सैनिकों ने हिस्सा लिया था. अभी तक यह माना जाता रहा है कि करीब चार लाख मुसलमानों ने प्रथम विश्व युद्ध में हिस्सा लिया था. बर्मिघम सिटी यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी साहित्य के प्रवक्ता इस्लाम ईसा ने अपने शोध में पाया है कि मित्र राष्ट्रों ने प्रथम विश्वयुद्ध में 885,000 मुसलमानों की भर्ती की थी.

885000 मुस्लिम सैनिकों ने प्रथम विश्वयुद्ध में लिया था हिस्सा

माना जाता था कि चार लाख मुसलमानों ने प्रथम विश्वयुद्ध में हिस्सा लिया था. लेकिन, ईसा ने हजारों निजी पत्रों, ऐतिहासिक अभिलेखों, रेजीमेंट की डायरियों और जनगणना रिपोर्टों के अध्ययन से पाया कि यह संख्या चार लाख के दोगुने से भी अधिक है.

उन्होंने बताया कि अध्ययन में पाया गया कि 15 लाख भारतीयों और अल्जीरिया, मोरक्को और ट्यूनीशिया के 280,000 मुसलमानों ने मित्र राष्ट्रों की तरफ से युद्ध किया था. अफ्रीका के अन्य हिस्सों से भी सैनिक भर्ती किए गए थे.

बयान में बताया गया है कि भारत से युद्ध में मदद के लिए 37 लाख टन सामानों की आपूर्ति की गई थी. 170,000 पशु भेजे गए थे. ईसा ने अध्ययन में पाया कि फ्रांस या ब्रिटेन की कमान में मित्र राष्ट्रों के लिए लड़ते हुए 89,000 मुसलमानों ने अपनी जान दी थी.

उन्होंने पाया कि ब्रिटिश साम्राज्य ने युद्ध के लिए जो भर्तियां की थीं, उनमें 20 फीसदी मुसलमान थे. भारत से आज की दर के हिसाब से 20 अरब पौंड की वित्तीय व अन्य तरह की मदद दी गई थी.

ईसा को ये जानकारियां मानचेस्टर में ब्रिटिश म्यूजियम हेरिटेज सेंटर में लगी अपनी ‘स्टोरीज ऑफ सैक्रीफाइस’ प्रदर्शनी के लिए सामग्री जुटाने के दौरान मिलीं. प्रथम विश्वयुद्ध में मुसलमानों के योगदान को दिखाने वाली यह प्रदर्शनी कम से कम पूरे एक साल चलेगी. (न्यूज़ 18)


लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

Facebook Comment

Related Posts

loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें