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500 और 1000 के नोटों को अमान्य किये जाने के फैसले के बाद सरकार को तारीफे मिल रही हैं तो आलोचनाओ का भी सामना करना पड़ ररहा हैं. विश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बासु ने केंद्र के इस फैसले को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ननुकसानदेह बताया.

बीबीसी रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि भारत में 500 और 1000 के रुपयों को रद्द करना अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है. प्रोफ़ेसर बासु ने कहा कि इससे फायदे की जगह व्यापक नुक़सान होगा. भारत ने भ्रष्टाचार और अवैध रूप से नकदी रखने वालों को काबू में करने के लिए 500 और 1000 के पुराने नोटों को रद्द करने का फैसला किया था. लेकिन इस फ़ैसले से कम आय वाले ज़्यादातर लोग, व्यापारी और बचत करने वाले साधारण लोग जो नकदी अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं, वे बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. सरकार के इस फैसले से बैंकों के बाहर भगदड़ की स्थिति है.

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बीबीसी रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, ”भारत में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) अर्थव्यवस्था के लिए ठीक था लेकिन विमुद्रीकरण (नोटों का रद्द किया जाना) ठीक नहीं है. भारत की अर्थव्यवस्था काफ़ी जटिल है और इससे फायदे के मुक़ाबले व्यापक नुक़सान उठाना पड़ेगा.’

बीबीसी रिपोर्ट के अनुसार, प्रोफ़सर बासु का कहना है कि एक बार में सबकुछ करने के बावजूद ब्लैक मनी के बारे में यह नहीं कहा जा सकता कि अब इसकी मौज़ूदगी संभव नहीं है. कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस कदम का सीमित असर होगा. लोग नई करेंसी के आते ही तत्काल ब्लैक मनी ज़मा करना शुरू कर देंगे.

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