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तीन तलाक को लेकर चल रही बहस के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तलाकशुदा महिलाओं को गुज़ारा भत्ता देने की मांग पर विचार किया जा रहा हैं.

18 से 20 नवंबर को होने वाले बोर्ड के तीन दिवसीय वार्षिक सम्मलेन में इस मसले को उठाये जाने की संभावना हैं. याद रहें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तीन तलाक पर प्रतिबंध के खिलाफ हैं. ऐसे में तलाकशुदा महिलाओं को गुज़ारा भत्ता देने की मांग पर बोर्ड समर्थन दे सकता हैं.

मुस्लिम समाज में ज्यादातर तीन तलाक के सामाजिक मुद्दे होते हुए भी अदालत पहुंच जाते है. अब ऐसे में बोर्ड को लगता हैं कि तलाकशुदा महिलाओं के गुज़ारे भत्ते की व्यवस्था करने के बाद ये मामले अदालत में नहीं पहुंचेगे.

लखनऊ से एक बोर्ड के सदस्य ने इस विचार को इस्लामी शरीयत के अनुसार बताते हुए कहा कि हजरत उमर फारूक के शासन के दौरान, ऐसी महिलाओं को बैतूल माल से गुज़ारा भत्ता दिया जाता था. हम भी इस तरह के उपायों को अपनाने का प्रयास करेंगे.

उन्होंने आगे बताया कि प्रस्ताव में केवल उन तलाकशुदा महिलाओं को ही गुज़ारा भत्ता देने पर विचार किया जा रहा हैं. जिनकी दोबारा निकाह नहीं हुआ. और जो आर्थिक रूप से जिंदगी गुजारने में सक्षम नहीं है.


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