मोदी सरकार भले ही देश में असहिष्णुता को नकारती रहे लेकिन सयुंक्त राष्ट्र की यूनिवर्सिटी कुछ और ही बयान कर रही हैं. यूनिवर्सिटी द्वारा की गई रिसर्च में मोदी सरकार के दावों की पोल खुल गयी हैं. आज भी देश में मुस्लिम समाज के साथ भेदभाव किया जाता हैं. यूनिवर्सिटी द्वारा कराए गये सर्वे में खुलकर सामने आया कि आज भी देश के कई हिस्सों में मुस्लिम समुदाय के लोगो को किराये के मकान नहीं दिए जाते हैं.

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फिनलैंड की युनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी वर्ल्ड इंस्टीट्यूट ऑफ डेवेलपमेंट इकोनॉमिक्स रिसर्च (UNI-WIDER) ने अपने एक शोध में दिल्ली, गुड़गांव (गुरुग्राम) और नोएडा के इलाकों को शामिल किया था। रिसर्च में पता लगा कि किसी मुस्लिम को घर तलाशने के लिए 45 जगह आवेदन देना पड़ता है जिसमें से 10 ही लोग उसे घर देने को तैयार होते हैं। वहीं, ऊंची जाति के हिंदू अगर 28 जगह पर आवेदन करते हैं तो उन्हें सभी लोग घर देने को राजी रहते हैं।

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इस रिसर्च के लिए संस्थान ने साल 2015 के दो महीने के आकंड़े लिए हैं। यह आकंड़े भारत की मशहूर वेबसाइट्स के थे, जो की यहां पर घर ढूंढ़ने में लोगों की मदद करती हैं। इस रिपोर्ट को विक्रम पठानिया नाम के शख्स ने UNU-WIDER की तरफ से लोगों से सामने रखा है। इसको ‘For whom does the phone (not) ring? Discrimination in the rental housing market in Delhi, India’ नाम दिया गया है।

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