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चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ने रविवार को केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि केवल विकास के नारे लगाने से न्याय व्यवस्था बेहतर नहीं होने वाली हैं.

उन्होंने कहा कि अभी देश की अदालतों में करीब 3 करोड़ मामले लंबित हैं जो अगले 15-20 साल में 5 करोड़ हो जायेंगे. उन्होंने न्याय दिलाने के लिये जजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत हैं. उन्‍होंने कहा कि ”हम भले विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश मंगाते रहे और विकास के नारे लगाते रहें. मगर यह जरूरी है कि इस विकास से पैदा होने वाले विवादों से निपटने के लिए न्‍यायिक तंत्र को भी बेहतर बनाया जाए”

जस्टिस ठाकुर ने कहा, ”आज, देश में सिर्फ 18,000 जज हैं और निचली अदालतों में 3 करोड़ मामलों का विशाल बैकलॉग है। मैं इस बारे में सार्वजनिक मंचों पर, प्रधानमंत्री की मौजूदगी में बात करता रहा हूं. उन्होंने इस समस्या को भारतीय न्‍याय व्‍यवस्‍था के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि न सिर्फ न्‍यायपालिका, बल्कि पूरे देश को भुगतना पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि विधि आयोग की 1987 की रिपोर्ट के अनुसार तब 40 हजार न्यायाधीशों की आवश्यकता थी, लेकिन आज भी न्यायाधीशों की संख्या सिर्फ 18000 है. सीजेआई ने कहा कि अगर हालात में सुधार नहीं होता है तो अगले 15-20 साल में लंबित मामलों की संख्या पांच करोड़ के आंकड़े को पार कर जाएगी.


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