नई दिल्ली: दिल्ली सरकार सोमवार को वित्त वर्ष 2016-17 का बजट विधानसभा में पेश कर सकती है। माना जा रहा है कि इस बजट में दिल्ली सरकार वैट में बड़ी कटौती का ऐलान कर सकती है। इससे दिल्ली देश में सबसे कम टैक्स वाला सूबा बन सकता है। आम आदमी पार्टी इस मौके को टैक्स को रेशनलाइज करने यानी पुनर्गठन करने के अवसर के तौर पर देख रही है। इसके अलावा दिल्ली सरकार टैक्स से होने वाली कमाई को भी बनाए रखने पर ध्यान देना चाहेगी। मौजूदा छहस्तरीय वैट स्ट्रक्चर में बदलाव से दिल्ली सरकार को टैक्स कलेक्शन में मदद मिल सकेगी।
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इकोनाॅमिक टाइम्स की एक खबर के मुताबिक दिल्ली सरकार सामान्य इस्तेमाल की कई वस्तुओं को 12.5 पर्सेंट वैट टैक्स से बाहर कर 5 प्रतिशत के दायरे में ला सकती है। इससे दिल्ली के लोगों को तमाम चीजों पर सहूलियत मिल सकती है। खासतौर पर रेस्तरां में खाने, मार्बल टाइल्स और बाथरूम फिटिंग्स जैसी चीजों पर सरकार टैक्स सहूलियत दे सकती है। साथ ही केजरीवाल सरकार कपड़ों पर अलग-अलग टैक्स की बजाय सिंगल टैक्स लगाने पर विचार कर रही है। हालांकि ऐसे कुछ आइटम्स, जो टैक्स के दायरे से बाहर हैं, पर पांच प्रतिशत वैट लगाया जा सकता है लेकिन सूत्रों के मुताबिक, सरकार आम आदमी पर ज्यादा बोझ नहीं डालना चाहती है इसलिए दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाए जाने की संभावना कम ही है।
गौरतलब है कि दिल्ली की मौजूदा वैट टैक्स व्यवस्था छहस्तरीय है। पहली श्रेणी में छूट प्राप्त आइटम्स है जैसे- सीएनजी, पीएनजी, चावल और गेहूं। सोने और चांदी के अलावा अन्य कई वस्तुएं दूसरी लिस्ट में हैं जिन पर एक प्रतिशत टैक्स लगता है। वहीं, रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुएं जैसे पांच हजार रुपये से कम के जूतों और कपड़ों और 10 हजार रुपये से कम के मोबाइल पर पांच पर्सेंट टैक्स लगता है। चैथी श्रेणी में लग्जरी आइटम्स जैसे ब्रांडेड घडि़यां, शराब और अन्य वस्तुएं शामिल हैं। पांचवीं श्रेणी में रेस्तरां का खाना और हार्डवेयर आइटम्स हैं जिन पर 12.5 पर्सेंट टैक्स लगता है। इसके अलावा पेट्रोलियम-डीजल उत्पादों और एविएशन ईंधन पर 18 से 30 प्रतिशत तक का टैक्स लगता है।
वैट को रेशनलाइज करने के साथ ही सरकार की योजना उन गैरपंजीकृत डीलरों और कमर्शल टैक्स न चुकाने वालों को भी कर के दायरे में लाने पर विचार कर रही है। अपने चुनावी घोषणापत्र में आम आदमी पार्टी ने टैक्स व्यवस्था को तीन सूत्रीय करने का वादा किया था। पार्टी ने वादा किया था कि वह वैट की व्यवस्था को आसान करने के साथ ही दरों में भी कटौती करेगी। मौजूदा वित्त वर्ष में दिल्ली सरकार ने 20 हजार करोड़ रुपये के वैट की वसूली की है। बीते साल दिल्ली सरकार ने 18 हजारा 500 करोड़ रुपये वैट की वसूली की थी। (इंडिया संवाद)

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