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राज्यसभा में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के ‘आमिर ख़ान’ पर दिए विवादस्पद बयान को लेकर सोमवार को जमकर हंगामा हुआ. 30 जुलाई को आयोजित पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम में रक्षामंत्री ने आमिर खान का नाम लिए बिना उन्हें सबक सिखाने की बात कही थी. इस पर विपक्ष के कुछ सांसदों ने पर्रिकर के लिए कहा कि ‘वह रक्षामंत्री हैं, रक्षा कहा हैं.

राज्यसभा में कांग्रेस के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि इस देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए. जनता दल यूनाइटेड के शरद यादव ने कहा ये पूरे समुदाय को धमकाने की बात है. पर्रिकर देश के रक्षा मंत्री है, इस तरह के बयान से वो किसकी रक्षा कर रहे हैं.”

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, ”कल क्या आप मुझे डराएँगे, क्या आप कहेंगे कि इसका सामाजिक बहिष्कार करेंगे. ये कैसे रक्षा मंत्री है. ये किसकी रक्षा कर रहे हैं. ये रक्षा मंत्री होते हुए असुरक्षा फैला रहे हैं.”

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, जब से केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी है देश में धार्मिक अल्पसंख्यक ख़ासकर मुसलमानों को निशाना बनाया गया. अब दलितों को पूरे देश में निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को सदन में आकर इस पर बयान देना चाहिए और अपने मंत्रियों पर लगाम भी लगानी चाहिए. मायावती ने आगे कहा कि अगर प्रधानमंत्री इस विषय पर नहीं बोलते हैं, तो यह माना जाएगा कि मंत्री उनकी शह पर बोल रहे हैं.

समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने कहा, मैंने वीडियों देखा है. यह सीधे-सीधे अल्पसंख्यकों को धमकाने की बात है. तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने सांप्रदायिक हिंसा का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि ‘एक-दो बार की हिंसा तो ग़लती हो सकती है लेकिन अब ऐसा लगता है कि ऐसा किसी फैसले के तहत हो रहा है.’

हालांकि पर्रिकर ने राज्यसभा में कहा कि ‘सदस्य पहले वीडियो देखें उसके बाद ही किसी भी तरह के फैसले पर पहुंचे.’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘मैंने किसी का नाम नहीं लिया और न ही किसी को धमकाया.’


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