दिल्ली हाई कोर्ट की जज संगीता ढींगरा की अध्यक्षता वाले एक विशेष न्यायाधिकरण ने वहाबी स्कॉलर जाकिर नाइक के एनजीओ इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले को सही करार देते हुए जारी रखने का आदेश दिया है.

न्यायाधिकरण की पीठासीन अधिकारी ने पाया कि आईआरएफ भारत की संप्रभुता, एकता, अखंडता और सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाली गतिविधियों में शामिल रहा है,

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न्यायाधिकरण ने कहा, रिकार्ड में रखी गयी समस्त सामग्री से पता चलता है कि आईआरएफ ऐसी गतिविधियों में शामिल था जो न केवल युवकों को भारत की संप्रभुता, एकता, अखंडता और सुरक्षा को खतरा पहुंचाने के इरादे से गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए उकसाती और बढ़ावा देती हैं, बल्कि भारत के खिलाफ विद्वेष पैदा करती है.

उन्होंने कहा, जिससे इस बात में कोई संदेह नहीं लगता कि गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम :यूएपीए:, 1967 की धारा के तत्व लागू होते है और इस निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है कि आईआरएफ को गैरकानूनी संगठन घोषित किया जाए,

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