वरिष्ठ आइएएस अधिकारी चेतन बी सांघी ने केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिख कर कहा है कि उन पर दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) घोटाले की जांच में एक खास वीआइपी का नाम शामिल करने के लिए दबाव डाला गया था..

वरिष्ठ आइएएस अधिकारी चेतन बी सांघी ने केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिख कर कहा है कि उन पर दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) घोटाले की जांच में एक खास वीआइपी का नाम शामिल करने के लिए दबाव डाला गया था। सांघी ने केंद्र में प्रतिनियुक्त मांगी है। गृह सचिव को 28 दिसंबर को लिखे पत्र में सांघी ने अरुण जेटली का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया है। लेकिन दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल राहुल मेहरा पर चेतन सांघी पर जांच रिपोर्ट में अरुण जेटली का नाम डालने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है।

गुप्ता ने कहा कि आप सरकार ने मेहरा को कहा था कि वे हर हाल में अरुण जेटली का नाम जांच रिपोर्ट में शामिल करवाएं। अपने पत्र में सांघी ने लिखा है कि सतर्कता विभाग का भी जिम्मा होने के कारण उन्हें दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) की जांच का जिम्मा 12 नवंबर को दिया गया। इस जांच समिति में खेल और शिक्षा विभाग के सचिव पुण्य एस श्रीवास्तव (आइएएस) और दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल राहुल मेहरा भी शामिल थे। उन्होंने लिखा है कि तीन दिन में डीडीसीए में अनियमितताओं की जांच करते हुए जांच रिपोर्ट का सारांश सौंपा गया। इसमें दिल्ली में क्रिकेट का स्तर सुधारने के लिए डीडीसीए के सुधार की बात कही गई थी।

सांघी ने लिखा है कि इस मामले के विवादास्पद होने की वजह से उन पर बहुत से लोगों का दबाव था। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि बहुत से पूर्व क्रिकेटर डीडीसीए में कुप्रबंधन को लेकर बहुत मुखर थे। मीडिया में भी कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे थे। उन्होंने लिखा है कि खासतौर पर एक वीआइपी का नाम शामिल करने पर जोर अधिक था। सांघी ने लिखा है कि रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद दिल्ली में हुए एक टैस्ट मैच की मेजबानी का मामला अदालत पहुंच गया। मैं अपने काम पर लग गया। लेकिन अचानक एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने मेरे खिलाफ दो मामले दर्ज करा दिए। ये मामले में 2010-2012 में दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन (डीएसआइआइडीसी) के सीएमडी के रूप में मेरे कार्यकाल में हुई कुछ अनियमितताओं को लेकर थे।

इस दौरान मीडिया में राजनीतिक दलों ने आरोप लगाए कि यह कार्रवाई प्रतिशोध के तौर पर की गई है। सांघी ने पत्र में केंद्र प्रतिनियुक्ती की मांग की है। चेतन सांघी इस समय लंबी छुट्टी पर चल रहे हैं। डीडीसीए का मामला उस सयम चर्चा में आया जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने दिल्ली सचिवालय में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर छापा मारा। छापे के बाद अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सीबीआइ राजेंद्र कुमार के बहाने डीडीसीए की जांच से जुड़ी फाइल हासिल करने आई थी।

वहीं जांच रिपोर्ट के आधार पर भाजपा ने केजरीवाल पर डीडीसीए मामले में केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली को बदनाम करने का आरोप लगाया। जेटली ने इस मामले में केजरीवाल समेत आप के पांच नेताओं के खिलाफ मानहानि का मामला भी दर्ज कराया है। सांघी की चिट्ठी सामने आने के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि जेटली का नाम रिपोर्ट में शामिल करने के लिए दवाब बनाने का उद्देश्य उनका चरित्र हनन करना था। लेकिन सांघी अंतरात्मा की आवाज सुनते हुए आप नेताओं के दबाव में नहीं आए और अपनी 337 पेज की रिपोर्ट में जेटली का नाम नहीं लिया। बाद में सांघी को आप नेताओं का आदेश न मानने का खमियाजा भुगतना पड़ा।

विजेंद्र गुप्ता ने इस मामले की जांच कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। 1988 बैच के आइएस अधिकारी संजीव सहाय के बाद चेतन सांघी दूसरे आला अधिकारी हैं, जो हाल ही के विवाद में आप सरकार के निशाने पर आए हैं। फरवरी 2015 में अरविंद केजरीवाल सरकार बनने के बाद जिन अधिकारियों से सकार का विवाद हुआ उसकी सूची काफी लंबी है। साभार: जनसत्ता


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