ऊना से पहले राजुला में भी हुई थी दलितों की पिटाई, जिंदा जला...

गुजरात के उना में भगवा संगठनों द्वारा कथित गौरक्षा को लेकर चार दलित युवकों की बेरहम पिटाई के बाद से ही गुजरात में दलितों पर अत्याचार से जुड़े एक से बढकर एक मामलें सामने आ रहे हैं. अब जो मामला सामने आया हैं ये उना की घटना से पहले का हैं. जिसमे कथित गौरक्षा को लेकर दलितों को बेदर्दी से पीटा गया और उनके जिन्दा जलाने की तैयारी थी लेकिन मौके पर पहुंचकर पुलिस ने इन्हें बचा लिया.

22 मई को करीब 30 गौ रक्षकों ने राजुला में  दिलीप बाबरिया सहित 5 अन्य लोगों के साथ करीब ढाई घंटे तक बंधक बनाकर लोहे के पाइप, बेसबॉल बैट और तलवार से पिटाई की थी. पीड़ित के मुताबिक, उन गौ रक्षको की योजना हमें एक कमरे में बंद कर जिंदा जला देने की थी, लेकिन वक्त रहते कुछ लोग पुलिस के पास पहुंच गए और पुलिस ने समय पर आकर इन्हें उन लोगों से बचा लिया.

इस मामले से जुड़े करीब 13 आरोपियों की पिछले हफ्ते ही गिरफ्तारी हुई है। हालांकि यह गिरफ्तारियां ऊना में हुई घटना के सामने आने की बाद ही हुईं. राजुला मामले के पीड़ित दिलीप ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया, ‘मैं अब भी ढंग से सो नहीं पाता हूं और रात में कई बार अचानक उठकर बैठ जाता हूं. हम खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि वक्त रहते हमारा परिवार पुलिस के पास पहुंच गया, नहीं तो हमारी जान न बचती.

दिलीप के अलावा एक अन्य पीड़ित प्रवीण ने बताया, ‘चार गौ रक्षकों ने हमारे हाथ-पैर पकड़ रखे थे, जबकि बाकी के लोग बारी-बारी से हमारी लोह की रॉड और बैट से पिटाई कर रहे थे. हम अगर चिल्लाते, तो वह और ज्यादा मारते. जब उनका इससे भी मन नहीं भरा तो उन्होंने दो लोगों को केरोसिन लेने भेज दिया, जिससे हमें जिंदा जला सकें. लेकिन मौका रहते परिवार ने पुलिस को इसकी सूचना दे दी.’


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