स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने देश को संबोधित किये अपने अभिभाषण में दलितों और अल्पसंख्यकों पर होने वाले हमलों के परिप्रेक्ष्य में कहा कि इससे सख्ती से निपटा जाना चाहिए.

अपने संबोधन में उन्होंने अशांत, देश बांटने वाली और असहिष्णु ताकतों से सख्ती से निपटने और देश के कमजोर वर्गों के खिलाफ हमले रोके जाने की बात की. इसके अलावा उन्होंने पिछड़े और भटके हुए लोगों को विकास की मुख्यधारा में शामिल करने की भी बात की.

और पढ़े -   पाकिस्तान ने किया फिर से सीजफायर का उल्लंघन, एक जवान हुआ शहीद

उन्होंने कहा, ‘इन चार वर्षों में मैंने कुछ अशांत, विघटनकारी और असहिष्णु शक्तियों को सिर उठाते हुए देखा है। हमारे देश में कमजोर वर्गों पर हुए हमले बेहद शर्मनाक हैं और इन ताकतों से सख्ती से निपटने की जरूरत है.’ इसके अलावा महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर उन्होंने कहा कि हमारी महिलाओं और बच्चों को दी गई सुरक्षा और हिफाजत देश और समाज की खुशहाली तय करती है. एक महिला या बच्चे के खिलाफ हिंसा की हर घटना सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है, अगर ऐसे हमले नहीं रुकते तो हम एक सभ्य समाज नहीं कहला सकते.

और पढ़े -   महाराष्ट्र में फडनवीस की पत्नी का कंसर्ट, टिकेट बेचने का जिम्मा पुलिस पर

स्वामी विवेकानंद का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने देश की सामाजिक एकता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘भारत को जिस एक खास विशेषता ने एक सूत्र में बांध रखा है, वह एक दूसरे की संस्कृतियों और आस्थाओं की इज्जत करना है. इसके अलावा राष्ट्रपति ने देश के युवाओं को सरकार की डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाओं के जरिए आत्मनिर्भर बनाने का भी आह्वान किया.

और पढ़े -   उर्दू पूरे हिंदुस्तान की जुबान, राजनीति ने सिर्फ मुसलमानों की बना दिया: हामिद अंसारी

Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE