गुजरात के ऊना में भगवा संगठनों द्वारा कथित गौरक्षा के नाम पर ऊना में दलितों की पिटाई की घटना के बाद दलितों का विरोध अवॉर्ड वापसी तक पहुंच चूका हैं. गुजरात के दलित लेखक अमृतलाल मकवाना ने विरोध स्वरुप राज्य सरकार से मिले पुरस्कार को वापस लौटाने का फैसला किया हैं.

सुरेन्द्रनगर जिले में वाधवान कस्बे के रहने वालें मकवाना ने बताया कि वह बुधवार को अपना पुरस्कार और उसके साथ मिली 25,000 रुपये की राशि अहमदाबाद के जिलाधिकारी को वापस लौटाएंगे. उन्होंने इस बारें मे कहा कि गुजरात में ऐसी घटनाएं अक्सर हो रही हैं, लेकिन सरकार दलितों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रही है.

उन्होंने पुलिस कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए कहा, करीब 50 लोग कुछ दलित युवकों की पिटाई करते हैं लेकिन सिर्फ 16 गिरफ्तार होते हैं बाकि अभी तक आजाद क्यों घूम रहे हैं? मुझे सरकार की मंशा पर संदेह है. मुझे अब सरकार में विश्वास नहीं है. यदि नेताओं के मन में दलितों के लिए कोई सहानुभूति नहीं है, तो ऐसा पुरस्कार रखने का कोई औचित्य नहीं है.

गुजरात सरकार ने मकवाना को 2012-13 का ‘दासी जीवन श्रेष्ठ दलित साहित्य कृति अवार्ड’ दिया था. साथ ही 25,000 रुपये नकद, एक प्रमाणपत्र और शॉल देकर सम्मानित किया गया था.


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