मुजफ्फरनगर | गंगा जमुनी तहजीब और हिन्दू मुस्लिमो के बीच सोहार्द के लिए प्रसिद्ध रहा मुजफ्फरनगर , आज भी उन दंगो के दाग से खुद को मुक्त करने की जद्दोजहद में लगा हुआ है जो उसके चेहरे पर चार साल पहले लगे थे. हालाँकि वो दाग अब धीरे धीरे धूमिल होते जा रहे है लेकिन कुछ राजनितिक लोग अभी भी समाज को दो भागो में बाँटने की कोशिश करते रहते है.

लेकिन इन राजनितिक लोगो के बीच समाज का एक बड़ा तबका ऐसा भी है जो दोनों समुदाय के बीच शांति और सौहार्द बनाये रखने के लिए प्रयास करता रहता है. एक ऐसे ही प्रयास में मुजफ्फरनगर के दलितों ने बड़ा निर्णय लेते हुए भाई चारे की मिसाल कायम की है. यहाँ के दलितों ने फैसला किया है की वो रमजान के महीने में मंदिरों में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नही करेंगे.

मुजफ्फरनगर के मोरना गाँव में हुए शांति समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया. रमजान के अलावा आने वाले दिनों में ईद और ज्येष्ठ दशहरा गंगा स्नान पर्व को लेकर मोरना के रामलीला चौक पर शांति समिति की बैठक आयोजित की गयी. इस बैठक में भोपा थाना के सीओ अकील अहमद ने भी हिस्सा लिया. इस दौरान भोपा थाना के प्रभारी विजय सिंह और ग्राम प्रधान शहजाद अंसारी भी मौजूद रहे.

बैठक में दलित नेता संजय सिंह ने प्रस्ताव रखा की मुस्लिम समाज की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए दलित समाज रोजा इफ्तार और सहरी के समय मंदिरों में लाउडस्पीकर नही बजायेगा. इस पर सभी दलित वर्ग के लोगो ने अपनी सहमती जताई. वही मुस्लिम समाज ने भी इस कदम का स्वागत किया. इस दौरान सीओ भोपा थाना ने रमजान माह में लोगो से शांति बनाये रखने की अपील की. वही मुनव्वर जैदी ने ख़राब विधुत आपूर्ति पर रोष प्रकट किया और रमजान के महीने में विधुत आपूर्ति सुचारू रखने की मांग की.


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