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अहमदाबाद: दलितों का जनाक्रोश इस कदर बढ़ जायेगा शायद सरकार को इसकी उम्मीद नही थी हालाँकि जिस तरह मुंबई के बाद अहमदाबाद में दलितों ने शक्ति प्रदर्शन किया है उसे देखकर इसे दलित आन्दोलन का नाम देना उचित रहेगा.

जहाँ इस महासम्मलेन में दलितों पर हुए अत्याचार के विरोध में दलितों ने मरे हुए पशुओं को ना उठाने का संकल्प लिया है वहीँ आक्रोशित दलित नेताओं ने सरकार से यह मांग की है की उनकी सुरक्षा के लिए दलितों को हथियार रखने का लाइसेंस दिया जाएँ.

इस सम्मलेन की एक और ख़ास बात यह रही की इसमें मुस्लिम और दलितों ने एक ही स्वर में अत्याचार के विरुद्ध आवाज़ उठायी.इस रैली को जमीयत-ए-उलेमा-हिंद का समर्थन हासिल था। अहमदाबाद के तीन मुसलमान नेताओं ने इस रैली में भाग लिया और मंच पर बैठे। रैली में कई मुसलमान कार्यकर्ताओं को देखा जा सकता था।

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30 दलित संगठनों के संयुक्त मोर्चा के संयोजक जिग्नेश मेवानी ने कहा, “सरकार हमें अपनी रक्षा के लिए अनिवार्य रूप से आग्नेयास्त्र रखने का लाइसेंस दे क्योंकि सरकार हमें सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम रही है।” उन्होंने कहा, “हम लोगों ने बहुत सह लिया। यदि ऊंची जाति के शोषकों ने हमें फिर उत्पीड़ित किया तो हम उनके हाथ-पैर तोड़ देंगे।”

उन्होंने कहा कि सरकार को दलितों को मार्शल आर्ट सिखाने में भी मदद करनी चाहिए।

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दलितों पर वर्ष 2012 में हुए पुलिस के हमले का हवाला देते हुए वक्ताओं ने रैली में शिकायत की कि उस सरकार से कोई उम्मीद नहीं की जा सकती है जो आरोप पत्र भी नहीं दायर कर सकी है।

सुरेंद्र नगर जिले के धनगढ़ इलाके में हुए उस हमले में तीन दलित मारे गए गए थे। उन तीनों के परिवार वाले भी इस रैली में मौजूद थे।

वक्ताओं ने मांग की कि 11 जुलाई की घटना में मरी हुई गाय की खाल उतारने पर दलितों की पिटाई करने के आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न रोकथाम) कानून के तहत कार्रवाई की जाए।

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गुजरात में ऐसा पहली बार हुआ है जब पूरे राज्य से 30 दलित समूह दशकों से मौजूद समस्याओं के खिलाफ एक साथ जुटे हैं। हालांकि जहां रैली हुई, वहां की क्षमता करीब पांच हजार लोगों की ही थी, लेकिन रैली में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। हजारों लोग आसपास के खाली स्थानों पर खड़े दिखे।

वक्ताओं ने मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के लिए एक मांगपत्र भी जारी किया जिनमें उन सभी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई जो 11 जुलाई की घटना में चुप रहकर भी शामिल थे।


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