odd-even

नयी दिल्ली – केजरीवाल सरकार का वो कथन आज सच होता नज़र आ रहा है जिसमे उन्होंने कहा था की ‘हम राजनीति करने नही, सीखाने आये है’. कई दशकों से प्रदूषण झेल रही दिल्ली में हालाँकि काफी सरकारें आई और चली गयी लेकिन अधिकतर नेताओं ने उन मुद्दों पर ध्यान नही दिया जिससे जनता सीधे जुडी होती है. मसलन के तौर पर जल, बिजली, प्रदूषण,मोहल्ला क्लिनिक.

इस बात में दो राय नही है की केजरीवाल सरकार ने राजनीति अपने लिए नही की बल्कि दिल्ली की जनता के लिए की, अपनी प्रत्येक योजना को अमली जमा पहनाने में सफल रहने वाले केजरीवाल की बेहद महत्वकंशी योजना odd-even की चर्चाये यूँ तो दुनियाभर में है लेकिन कल ही सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट(CSE) ने दावा किया है की दिल्ली में odd-even के करना प्रदूषण कम हुआ है.

कितना प्रदूषण हुआ कम 

CSE ने कहा की oddeven के दुसरे चरण के मात्र 9 दिनों में प्रदूषण की मात्रा में अच्छी खासी कमी देखि गयी है हालाँकि ये वो समय है जब दिल्ली के निकटवर्ती प्रदेशों में किसान खेतों के अवशेष जलाते है जिसके कारण प्रदूषण काफी हद तक बढ़कर हवा को ज़हरीला कर देता है.

प्रदूषण को PM (पार्टिकुलेट मैटर) में मापा जाता है सीएसई के मुताबिक, ऑड-ईवन स्कीम लागू होने के शुरुआती 9 दिनों (15 से 23 अप्रैल के बीच) में पल्यूशन लेवल में कमी दिखाई दी। इन 9 दिनों में पिछले पखवाड़े के मुकाबले पीएम 2.5 में 24 फीसदी की कमी नजर आई। 21 अप्रैल के बाद अचानक से पीएम 2.5 में 92 पर्सेंट और नाइट्रोजन ऑक्साइड में 47 पर्सेंट की बढ़ोतरी हो गई। 26 अप्रैल के बाद दिल्ली में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स में 16 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई। इसकी वजह जानने के लिए नासा की सैटलाइट तस्वीरों की जांच की गई। सीएसई के मुताबिक, पल्यूशन पर लगाम लगाने के लिए ऑड-ईवन जैसे अस्थाई कदम उठाए जाने जरूरी हैं। हालांकि, बेहतर परिणामों के लिए लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन करने होंगे।


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