दिसपुर | करीब डेढ़ महीने पहले सीआरपीएफ और पुलिस के साझा ऑपरेशन में बोडो के दो आतंकियों को एनकाउंटर में मार गिराया गया था. उस समय सुरक्षाबलो ने इसे बड़ी कामयाबी करार दिया था. लेकिन अब इस मामले में बेहद ही चौकाने वाली खबर सामने आई है. उत्तर पूर्व सीआरपीएफ के आईजी ने उस एनकाउंटर को फर्जी करार देते हुए मांग की है की मामले की सही से पूरी जाँच होनी चाहिए.

सीआरपीएफ के आईजी और आईपीएस रजनीश राय ने सीआरपीएफ के दिल्ली मुख्यालय को जो रिपोर्ट सौपी है उसमे यह जानकारी दी गयी है. उन्होंने बताया की 10 मार्च 2017 को चिरंग जिले में जिन दो लोगो के एनकाउंटर की बात की जा रही है वो फर्जी है. उस दिन एनकाउंटर करने के लिए दो लोगो को डीकलिंग नाम के गाँव से उठाया गया और फिर सिमलागुरी गाँव के पास उनका एनकाउंटर कर दिया गया.

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मारे गए दोनों लोगो के नाम लुकस नार्जेरी और डेविड इस्लेरी थे. रजनीश ने अपनी रिपोर्ट में कहा है की एनकाउंटर से कुछ घंटे पहले CoBRA की एक सीआरपीएफ यूनिट एनकाउंटर स्पॉट पर गयी थी. वो एनकाउंटर करने के लिए सही जगह की तलाश कर रह थे. इस बात की पुष्टि जीपीआरएस रिकॉर्ड से होती है. रजनीश ने आगे बताया की डेविड और लूकस का एनकाउंटर कर उनके शवो पर हथियार प्लांट किये गए जिससे लगे की यह इन आतंकियों ने उनके ऊपर हमला किया.

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रजनीश ने अपनी रिपोर्ट में यह भी दावा किया है की जिन घरो से दोनों को उठाया गया उस घर में एक 11 साल का बच्चा भी मौजूद था. जिसको उनकी एक पड़ोसन ऑपरेशन से पहले अपने घर ले गयी. रजनीश का दावा है की इस मामले से जुड़े कुछ चश्मदीद उसकी हिरासत में है. इन्ही लोगो ने मृतको की पहचान की थी. बताते चले की उस समय सुरक्षाबलो ने दावा किया था की दोनों शख्स का सम्बन्ध नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनबीएफबी(एस)) से था.

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