लखनऊ | केंद्र में बीजेपी सरकार बनने के बाद से गौसेवा और गौरक्षा को लेकर बहुत चर्चाये चली. इस दौरान खूब राजनीती भी हुई और गौरक्षको को कुछ बीजेपी शासित राज्यों में खुली छूट भी दी गयी. जिसकी वजह से कई लोगो को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा. लेकिन हर बार सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाये गए की आखिर क्यों किन गौरक्षको को खुली छूट दी हुई है.

अगर सरकार और गौरक्षको को गाय की इतनी ही फ़िक्र है तो वो वह उन गायो की रक्षा और सेवा क्यों नही करती जो सड़क पर भूखी और जख्मी घुमती रहती है. घास नही मिलने की वजह से कूड़े कचरे में पड़ी पोलीथीन को अपना भोजन बनाती है जिसकी वजह से हर साल हजारो गाय मौत के काल में समां जाती है. न जाने कितनी गाय बीमार और घायल अवस्था में सड़क पर दिखाई देती है.

लेकिन कोई भी गौरक्षक और न ही सरकार इनकी मदद नही करती. इसलिए यह सवाल लाजिमी है की क्या वो ही गाय गौरक्षको और बीजेपी नेताओ के लिए माँ की श्रेणी में आती है जो मुस्लिमो के पास से बरामद होती है. वो नही जो सडको पर भटकती रहती है. हालाँकि अभी तक इन सवालो के जवाब किसी भी सरकार और गौरक्षको की तरफ से नही मिले.

लेकिन लगता है की उत्तर प्रदेश की योगी सरकार गाय के इस पहलु को भी देख रही है. इसलिए उन्होंने बीमार गायो के इलाज के लिए मोबाइल गाय एम्बुलेंस सेवा शुरू की है. इसके अलावा एक टोल फ्री नम्बर भी जारी किया गया है जिसके जरिये कही पर भी बीमार यह जख्मी गाय की सुचना दी जा सकेगी. सोमवार को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद ने 5 मोबाइल गाय एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया.


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