नई दिल्ली | अभी हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावो के बाद ईवीएम् में गड़बड़ी का मामला शांत होता दिखाई नही दे रहा है. जहाँ विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठा रहा है वही अब अदालत भी ईवीएम् पर संदेह जताने लगी है. अभी कुछ दिन पहले नैनीताल हाई कोर्ट ने उत्तराखंड की 7 विधानसभाओ में इस्तेमाल हुई ईवीएम् को सील करने का आदेश दिया है. कुछ ऐसा ही आदेश दिल्ली की एक अदालत ने भी दिया है.

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दिल्ली की साकेत अदालत ने अभी हाल ही में हुए एमसीडी इलेक्शन में इस्तेमाल हुई ईवीएम् को सील करने का आदेश दिया है. अदालत ने छत्तरपुर के वार्ड नम्बर 70एस में इस्तेमाल हुई सभी ईवीएम् को यथास्थिति में रखने और अगले आदेश तक सील करने का आदेश दिया है. इसके अलावा अदालत ने जीते हुए पार्षद को शपथ दिलाने पर भी रोक लगा दी है.

दरअसल छत्तरपुर वार्ड से आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी पिंकी त्यागी केवल दो वोटो से चुनाव हार गयी. हालाँकि पिंकी ने दोबारा मतगणना कराई लेकिन उसमे भी उन्हें जीत हासिल नही हुई. बाद में पिंकी ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए ईवीएम् की जांच कराने की मांग की. पिंकी का आरोप है की चुनावो में 26455 लोगो ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया लेकिन मतगणना में जो नतीजा आया है वो 26884 वोटो के आधार पर घोषित किया गया.

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पिंकी के इन आरोपों पर सुनवाई करते हुए जज आशा मेनन ने अगले आदेश तक वार्ड नम्बर 70एस की सभी ईवीएम् को सील करने का आदेश दिया. इसके अलावा वोट डालते समय मतदाता स्लिप और उस रजिस्टर को संभाल कर रखने के लिए कहा गया जिसमे मतदाता हस्ताक्षर करते है. मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी. लेकिन अगर यह आरोप सही पाए जाते है तो सबसे बड़ा सवाल यही है की आखिर ये अतिरिक्त 429 वोट कहाँ से आये?

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