केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने पटियाला हाउस कोर्ट परिसर में पत्रकारों की पिटाई मामले पर एक विवादास्पद बयान दिया है। रिजिजू से जब पूछा गया कि एक अदालत परिसर में जब पत्रकारों, छात्रों और शिक्षकों की पिटाई हो रही थी तो पुलिस ने वकीलों और अन्य के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की तो उन्होंने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि ‘क्या वहां हत्या हो रही थी।’

पत्रकारों की पिटाई पर रिजिजू का विवादित बयान, ‘क्या वहां हत्या हो रही थी’

रिजिजू ने कहा कि झगड़े के मुद्दे हो सकते हैं। क्या हत्या हो रही थी, मुझे नहीं पता। दिल्ली पुलिस के आयुक्त बी एस बस्सी द्वारा घटना को ‘मामूली झगड़ा’ बताए जाने और उस पर ‘गौर किए जाने’ के बारे में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने पलटवार किया कि ऐसा कौन कह रहा है। मुझे नहीं मालूम लेकिन मुझे विश्वास है कि पुलिस कार्रवाई करेगी। मुझे इस घटना के बारे में विस्तार से पता नहीं है।

इसी बीच अपने पेशेवर काम करने के दौरान पत्रकारों पर किए गए हमले को अस्वीकार्य बताते हुए भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस से पटियाला हाउस अदालत परिसर में मीडियाकर्मियों पर किए गए हमले के संबंध में रिपोर्ट मांगी है। पीसीआई अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सी के प्रसाद ने कहा कि हमारे अनुसार, वहां अपना पेशेवर काम कर रहे पत्रकारों पर हमला किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है। मैंने आज इस संबंध में एक रिपोर्ट मांगी है।

पत्रकारों ने मोदी सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारे लगाते हुए प्रेस क्लब ऑफ इंडिया से उच्चतम न्यायालय तक मार्च किया और हमले में शामिल वकीलों का लाइसेंस रद्द करने की मांग करते हुए इसके रजिस्ट्रार को एक ज्ञापन सौंपा। न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) ने भी इस संबंध में एक बयान जारी कर घटना की निंदा की है। (ibnlive)


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